दुर्ग; बेलौदी में डायरिया पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: 150 घरों की जांच, 58 मरीज सामने Aajtak24 News

दुर्ग; बेलौदी में डायरिया पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट: 150 घरों की जांच, 58 मरीज सामने Aajtak24 News

दुर्ग - जिले के पाटन विकासखंड अंतर्गत ग्राम बेलौदी में उल्टी-दस्त (डायरिया) के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी के निर्देश पर विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर व्यापक सर्वे और जांच अभियान शुरू किया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा 14 मई को गांव के करीब 150 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 2 नए मरीज सामने आए। विभागीय जानकारी के अनुसार, 11 मई से अब तक कुल 58 लोग उल्टी-दस्त से प्रभावित पाए गए हैं। इनमें से 10 मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 मरीज जिला अस्पताल, 3 मरीज सेलूद हॉस्पिटल और 1 मरीज आस्था हॉस्पिटल में भर्ती हैं, जबकि शेष मरीजों का उपचार घर पर ही चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है और स्थिति वर्तमान में नियंत्रण में है। ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए डॉ. सी.बी.एस. बंजारे, जिला सर्वेलेन्स अधिकारी, डॉ. भुनेश्वर कठौतिया (खंड चिकित्सा अधिकारी), डॉ. उमेश मिर्जा, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट, और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों एवं मितानिनों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

टीम द्वारा घर-घर जाकर पानी के स्रोतों, स्वच्छता व्यवस्था और मरीजों की स्थिति की जांच की जा रही है ताकि संक्रमण के कारणों की पहचान कर उसे रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे केवल उबला हुआ पानी ही पिएं, बासी या सड़ी-गली सब्जियों का सेवन न करें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें। विभाग का कहना है कि सक्रिय सर्वे और निगरानी के कारण स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. अगर 58 मरीज सामने आ चुके हैं, तो क्या स्वास्थ्य विभाग यह स्वीकार करता है कि गांव में पानी या स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी पहले से कमजोर थी, जिसकी वजह से संक्रमण फैला?
  2. क्या यह बताया जा सकता है कि उल्टी-दस्त के इस प्रकोप का वास्तविक स्रोत क्या है—पानी, हैंडपंप, या कोई अन्य कारण—या अब तक जांच केवल सर्वे स्तर पर ही सीमित है?
  3. 10 मरीज अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद “स्थिति सामान्य” बताई जा रही है, तो क्या प्रशासन के पास कोई स्पष्ट मेडिकल कंट्रोल इंडिकेटर है जिसके आधार पर यह दावा किया जा रहा है?

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