गरियाबंद; 700 शिकायतें, 14 गांव… नवापारा शिविर में उमड़ा जनसैलाब, अधिकारियों को तुरंत समाधान का आदेश Aajtak24 News

गरियाबंद; 700 शिकायतें, 14 गांव… नवापारा शिविर में उमड़ा जनसैलाब, अधिकारियों को तुरंत समाधान का आदेश Aajtak24 News

गरियाबंद - विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रहे सुशासन तिहार 2026 के तहत मंगलवार को छुरा विकासखंड के ग्राम नवापारा में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 14 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए और कुल 700 आवेदन प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए गए। शिविर में राजिम विधायक रोहित साहू ने कहा कि यह कार्यक्रम आम जनता को सीधे शासन से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है, इसलिए प्रत्येक आवेदन का गंभीरता से परीक्षण कर त्वरित निराकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशानी न हो और सभी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाए।

विधायक ने किसानों के हितों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि शिविर में प्राप्त सभी आवेदन समय-सीमा में निराकृत किए जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। शिविर में जनपद पंचायत अध्यक्ष मीरा ठाकुर ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया और अधिकारियों से कहा कि सभी आवेदन गंभीरता से लेकर जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे।

इस दौरान बीएस उइके और विशाल महाराणा सहित जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को सामग्री भी वितरित की गई। हालांकि एक ही शिविर में 700 आवेदन आना यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बुनियादी समस्याएं बड़ी संख्या में लंबित हैं, जिनके समाधान के लिए लगातार और मजबूत प्रशासनिक निगरानी की आवश्यकता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जब एक ही शिविर में 700 आवेदन आ रहे हैं, तो क्या यह ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक स्तर पर समाधान प्रणाली की कमजोरी नहीं दर्शाता?
  2. क्या प्रशासन यह बताएगा कि पिछले सुशासन तिहार शिविरों में कितने आवेदन पूरी तरह निपटाए जा चुके हैं और कितने अब भी लंबित हैं?
  3. शिविरों में समाधान के दावे के बावजूद लोग बार-बार शिकायत लेकर क्यों आ रहे हैं—क्या फील्ड स्तर पर निगरानी व्यवस्था कमजोर है?

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