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| रायगढ़ में औषधि दुकानों की सघन जांच, 6 मेडिकल स्टोर्स पर कार्रवाई Aajtak24 News |
रायगढ़ - जिले में “सही दवा-शुद्ध आहार—यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने औषधि दुकानों पर सघन जांच अभियान चलाया। इस कार्रवाई ने शहर के मेडिकल कारोबार में हलचल बढ़ा दी है, जहां कई प्रतिष्ठानों के रिकॉर्ड और दवाओं के भंडारण की बारीकी से जांच की गई।
किन दुकानों की हुई जांच
निरीक्षण अभियान के तहत कुल 6 मेडिकल स्टोर्स की जांच की गई—
- रजा मेडिकल-2 (जूटमिल)
- बालाजी मेडिकल स्टोर
- श्री पटेल मेडिकल स्टोर
- शैल मेडिकोज
- गर्ग मेडिकल
- सिद्धी विनायक मेडिकल स्टोर
जांच में क्या-क्या देखा गया
औषधि विभाग ने निरीक्षण के दौरान कई अहम पहलुओं की जांच की—
- दवाओं का भंडारण मानक
- बिक्री रजिस्टर और दस्तावेज
- संदिग्ध दवाओं का क्रय-विक्रय
- लाइसेंस की वैधता
- गुणवत्ता मानकों का पालन
कुछ प्रतिष्ठानों से दवाओं के नमूने लेकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
कानून के दायरे में सख्ती
निरीक्षण औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियमावली 1945 के तहत किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का सख्त संदेश
सहायक औषधि नियंत्रक ने कहा—
- आम जनता को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है
- अवैध या संदिग्ध दवाओं पर सख्त निगरानी जारी रहेगी
- नियमित जांच अभियान आगे भी जारी रहेंगे
जनता से अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि—
- केवल लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर्स से ही दवाएं खरीदें
- किसी भी अनियमितता की तुरंत सूचना दें
- बिना पर्ची या संदिग्ध दवाओं से बचें
असल तस्वीर क्या कहती है?
यह अभियान केवल औषधि दुकानों की जांच नहीं, बल्कि दवा बाजार में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, बार-बार होने वाली ऐसी कार्रवाई यह सवाल भी उठाती है कि क्या सिस्टम में नियमित निगरानी की कमी के कारण ही इस तरह के अभियान जरूरी हो जाते हैं?
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. क्या दवा दुकानों की नियमित मॉनिटरिंग प्रणाली इतनी कमजोर है कि बार-बार सघन जांच अभियान चलाना पड़ता है?
2. जिन दुकानों में अनियमितता पाई जाती है, क्या उनके खिलाफ कार्रवाई स्थायी प्रभाव डालती है या वे कुछ समय बाद फिर सामान्य रूप से चलने लगती हैं?
