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| नीमच; रात के सन्नाटे में कलेक्टर का छापा—छात्रावास की रसोई तक पहुंची जांच Aajtak24 News |
नीमच - जिले के जनजाति बाहुल्य ग्राम टामोटी में मंगलवार की रात एक अलग ही प्रशासनिक हलचल देखने को मिली, जब कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने अचानक रात्रि चौपाल के बाद आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावास का मध्यरात्रि औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण ने न सिर्फ छात्रावास की व्यवस्थाओं को परखा, बल्कि यह भी संकेत दिया कि प्रशासन अब जमीनी हकीकत को सीधे मौके पर जाकर देखना चाहता है।
छात्रावास में क्या देखा गया?
कलेक्टर ने छात्रावास में पहुंचकर—
- विद्यार्थियों की रहने की व्यवस्था
- अध्ययन और खेल गतिविधियां
- पेयजल और बिजली की स्थिति
- शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था
- सुरक्षा व्यवस्था
का विस्तार से निरीक्षण किया।
रसोई की जांच: सबसे अहम फोकस
मध्यरात्रि निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा छात्रावास की रसोई रहा, जहां कलेक्टर ने—
- भोजन की गुणवत्ता
- साफ-सफाई
- खाद्यान्न स्टॉक रजिस्टर
- समय पर भोजन उपलब्धता
की बारीकी से जांच की।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों को किसी भी स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और समय पर भोजन मिलना चाहिए।
बच्चों से सीधे संवाद
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने छात्रों से बातचीत कर—
- उनकी दिनचर्या
- पढ़ाई की स्थिति
- परिवार से संपर्क
- खेल-कूद की सुविधाएं
- सुरक्षा से जुड़े मुद्दे
की जानकारी ली। यह संवाद निरीक्षण को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक फीडबैक आधारित प्रक्रिया बनाता नजर आया।
रात्रि चौपाल और रात्रि विश्राम का संदेश
कलेक्टर ने सिर्फ निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि टामोटी गांव में ही रात्रि विश्राम कर ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं और कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया।
यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से “फील्ड गवर्नेंस” का उदाहरण माना जा रहा है।
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
कलेक्टर ने जिला संयोजक सहित संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि—
- छात्रावास में किसी भी तरह की कमी तुरंत दूर की जाए
- पेयजल और बिजली व्यवस्था नियमित रहे
- अध्ययन सामग्री और भोजन में कोई लापरवाही न हो
- सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए
इस निरीक्षण का बड़ा संदेश क्या है?
यह दौरा केवल एक औचक निरीक्षण नहीं, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और छात्रावास व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को परखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
