| दुर्ग; एक गांव, 56 मरीज और स्वास्थ्य विभाग की दौड़: बेलौदी में उल्टी-दस्त ने बढ़ाई चिंता Aajtak24 News |
दुर्ग - जिले के पाटन विकासखंड स्थित ग्राम बेलौदी में अचानक उल्टी-दस्त के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। गांव में मरीज मिलने की सूचना के बाद स्वास्थ्य अमला तत्काल हरकत में आया और प्रभावित क्षेत्र में व्यापक सर्वे एवं जांच अभियान शुरू कर दिया गया। प्रशासन का दावा है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन लगातार मिल रहे मरीजों ने ग्रामीणों के बीच डर और सतर्कता दोनों बढ़ा दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी के निर्देश पर जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ. सी.बी.एस. बंजारे, खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भुनेश्वर कठौतिया, जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट श्रीमती रितिका सोनवानी सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिनों की मदद से प्रभावित क्षेत्र का घर-घर सर्वे किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 13 मई को 180 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें उल्टी-दस्त के 7 नए मरीज सामने आए। वहीं 11 मई से अब तक कुल 56 मरीजों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 11 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी मरीजों का उपचार घर पर ही किया जा रहा है। वर्तमान में चार मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन, दो जिला अस्पताल, तीन सेलूद अस्पताल, एक आस्था अस्पताल और एक महिमा अस्पताल में भर्ती बताए गए हैं। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी भी मरीज की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय सर्विलेंस और निगरानी कर रहा है।
गांव में बीमारी फैलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों से पानी उबालकर पीने, सड़ी-गली सब्जियों और दूषित खाद्य पदार्थों से बचने तथा किसी भी प्रकार की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करने की अपील की गई है। हालांकि प्रशासन स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहा है, लेकिन लगातार बढ़ते मामलों ने गांव में स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी रोकथाम नहीं हुई तो बीमारी और फैल सकती है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब 11 मई से लगातार मरीज मिल रहे थे, तो स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती स्तर पर संक्रमण रोकने के लिए कौन-से ठोस कदम उठाए और फिर भी मरीजों की संख्या 56 तक कैसे पहुंच गई?
- क्या स्वास्थ्य विभाग ने गांव के पेयजल स्रोतों और स्वच्छता व्यवस्था की जांच कर यह स्पष्ट किया है कि संक्रमण की असली वजह क्या है, या अभी भी कारणों को लेकर प्रशासन के पास ठोस जवाब नहीं है?
- प्रशासन स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहा है, लेकिन यदि हालात नियंत्रण में हैं तो फिर अलग-अलग अस्पतालों में मरीजों की भर्ती की नौबत क्यों आई और क्या गांव में भविष्य में ऐसे संक्रमण रोकने के लिए स्थायी योजना तैयार की गई है?