![]() |
| रीवा; 52 एकड़ में बसा ‘गौलोक’: रीवा के बसामन मामा वन्य विहार में 9 हजार गौवंशों को मिला आश्रय Aajtak24 News |
रीवा - गौवंश संरक्षण को लेकर रीवा जिले का बसामन मामा गौवंश वन्य विहार अब एक बड़े मॉडल के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। बुधवार को कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने वन्य विहार का दौरा कर यहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और संचालन समिति की कार्यप्रणाली की सराहना की। 52 एकड़ क्षेत्र में फैले इस विशाल गौवंश आश्रय स्थल में वर्तमान में करीब 8 हजार 966 गौवंशों को आश्रय दिया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गौवंशों के लिए बनाए गए शेड, भूसा भंडारण, पेयजल व्यवस्था और उपचार सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने प्राकृतिक खेती स्थल का भी अवलोकन किया और वहां किए जा रहे प्रयोगों में रुचि दिखाई। कलेक्टर ने कहा कि यह केवल गौशाला नहीं, बल्कि पशुधन संरक्षण का एक आधुनिक और व्यवस्थित केंद्र बन चुका है, जिसे आने वाले समय में और विस्तृत स्वरूप दिया जाएगा। भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने परिसर की प्राकृतिक सुंदरता और वातावरण की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यहां आने पर आध्यात्मिकता का अनुभव होता है और यह स्थल केवल संरक्षण ही नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का भी केंद्र बन सकता है।
एसडीएम दृष्टि जायसवाल ने कलेक्टर को व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वन्य विहार में गौवंशों की देखभाल के लिए नियमित भोजन, चिकित्सा और पानी की व्यवस्था की गई है। साथ ही प्राकृतिक खेती और जैविक संसाधनों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। कलेक्टर सूर्यवंशी ने संचालन समिति को निर्देश दिए कि बायोगैस प्लांट का कार्य शीघ्र शुरू कराया जाए, ताकि गौशाला को ऊर्जा और जैविक संसाधनों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सके। प्रशासन का मानना है कि इससे गोबर और जैविक अपशिष्ट का बेहतर उपयोग होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
हालांकि, इतने बड़े स्तर पर गौवंश संरक्षण को लेकर चुनौतियां भी कम नहीं हैं। हजारों पशुओं के भोजन, चिकित्सा और रखरखाव के लिए लगातार संसाधनों और मजबूत प्रबंधन की आवश्यकता होती है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मॉडल को लंबे समय तक कितनी प्रभावी तरीके से संचालित कर पाता है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- करीब 9 हजार गौवंशों के संरक्षण का दावा किया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन के पास इनके भोजन, चिकित्सा और रखरखाव के लिए दीर्घकालिक वित्तीय योजना भी है?
- गौवंश वन्य विहार को आधुनिक मॉडल बताया जा रहा है, लेकिन क्या जिले में अब भी सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं की समस्या पूरी तरह खत्म हो पाई है?
- बायोगैस प्लांट शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन क्या इससे पहले भी ऐसी परियोजनाओं की घोषणाएं हुई थीं और यदि हुईं तो वे अब तक जमीन पर क्यों नहीं उतर पाईं?
