सतना; मुख्य सचिव की दो टूक: 50 दिन से ज्यादा लंबित रही शिकायत तो अफसरों पर गिरेगी गाज!

सतना; मुख्य सचिव की दो टूक: 50 दिन से ज्यादा लंबित रही शिकायत तो अफसरों पर गिरेगी गाज! 

सतना - प्रदेश में सुशासन, किसानों की समस्याओं और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर की विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि आमजन से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के साथ हल किया जाए और सीएम हेल्पलाइन में कोई भी शिकायत 50 दिन से ज्यादा लंबित नहीं रहनी चाहिए। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण तय समय सीमा में निपटाए जाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिकारी समय सीमा में कार्रवाई नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की पहली जिम्मेदारी जनता को समय पर न्याय और राहत देना है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में आगामी बारिश और संभावित बाढ़ को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने सभी जिलों को बाढ़ राहत और आपदा प्रबंधन की तैयारियां पहले से पूरी करने के निर्देश दिए। राहत शिविर, बचाव दल और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया ताकि किसी भी स्थिति में जन-धन की हानि कम से कम हो।

सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख दिखाया। मुख्य सचिव ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की हर महीने बैठक आयोजित करने और हेलमेट अनिवार्यता का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ब्लैक स्पॉट खत्म करने और यातायात नियमों का पालन कराने से बड़ी संख्या में सड़क हादसों और मौतों को रोका जा सकता है। ई-डॉर पोर्टल पर दुर्घटनाओं की तत्काल जानकारी दर्ज कराने और प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों को मुफ्त उपचार देने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में अवैध खनन और परिवहन पर भी सख्ती दिखाई गई। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स से कहा कि खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए और लगाए गए जुर्माने की वसूली सख्ती से की जाए। खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव ने कहा कि मध्यप्रदेश की जीएसडीपी में खेती का योगदान लगातार बढ़ रहा है और अब यह 43 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उन्होंने खेती के साथ पशुपालन और मछलीपालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। केज कल्चर योजना में बड़ी संख्या में आवेदन मिलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने मछली उत्पादन के साथ उसके सुरक्षित भंडारण और विपणन की बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बताते हुए मुख्य सचिव ने स्वरोजगार योजनाओं के जरिए नई इकाइयां स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए अब सभी जिलों में ई-विकास सिस्टम लागू कर दिया गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि किसानों को केवल ई-टोकन के माध्यम से ही खाद का वितरण किया जाए। गेहूं उपार्जन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में 101 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया है और किसानों को 5 जून तक भुगतान सुनिश्चित किया जाए।बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान, मनरेगा कार्य, प्रधानमंत्री आवास योजना, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम, नशा और मिलावट के खिलाफ अभियान, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, नरवाई प्रबंधन और दूध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। साथ ही नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जमीन उपलब्ध कराने और औद्योगिक विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

सतना के एनआईसी कक्ष से कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, डीएफओ मयंक चांदीवाल, नगर निगम कमिश्नर शेर सिंह मीना, सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1.  जब हर समीक्षा बैठक में सीएम हेल्पलाइन और राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए जाते हैं, तो आखिर जमीनी स्तर पर शिकायतें महीनों तक लंबित क्यों रहती हैं?

2.  सरकार अवैध खनन और खाद वितरण में पारदर्शिता की बात कर रही है, लेकिन अब तक कितने प्रभावशाली लोगों पर वास्तविक कार्रवाई हुई और कितनों पर सिर्फ कागजी कार्रवाई करके मामला दबा दिया गया?

3. सड़क सुरक्षा और हेलमेट अनिवार्यता को लेकर लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, फिर भी जिले में सड़क हादसों और मौतों का आंकड़ा पूरी तरह नियंत्रित क्यों नहीं हो पा रहा?

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