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| सीधी; 411 फरियादी पहुंचे जनसुनवाई में! सीधी में शिकायतों का सैलाब, अफसरों को जवाबदेही का अल्टीमेटम Aajtak24 News |
सीधी - शैलेन्द्र सिंह सोलंकी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिलेभर से आए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों से पहुंचे कुल 411 आवेदकों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं। बड़ी संख्या में शिकायतों का सामने आना जिले की जमीनी व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है। जनसुनवाई के दौरान सीईओ शैलेन्द्र सिंह सोलंकी ने एक-एक आवेदन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि नागरिकों की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में अधिकारियों से विभिन्न मामलों की स्थिति पर जानकारी ली गई। सीईओ ने निर्देश दिए कि जिन प्रकरणों का तत्काल समाधान संभव है, उनमें मौके पर ही कार्रवाई की जाए, जबकि शेष मामलों में नियमानुसार जल्द निराकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि कार्रवाई के बाद आवेदकों को जानकारी देना अनिवार्य होगा, ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। जनसुनवाई में पहुंचे लोगों ने राजस्व, पंचायत, सड़क, पेंशन, राशन, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं प्रशासन के सामने रखीं। कई आवेदकों ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर शिकायतों का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें जिला मुख्यालय तक आना पड़ा।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती शिकायतों की संख्या यह भी संकेत दे रही है कि जमीनी स्तर पर विभागीय कार्यप्रणाली अपेक्षित गति से काम नहीं कर पा रही। जनसुनवाई में जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार और जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और अपने क्षेत्रों में लंबित शिकायतों तथा उनके निराकरण की स्थिति की जानकारी देते रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब एक ही जनसुनवाई में 411 लोग शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, तो क्या यह स्थानीय प्रशासन और विभागीय व्यवस्था की विफलता नहीं दर्शाता?
- क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि पिछली जनसुनवाईयों में मिले कितने आवेदन आज भी लंबित हैं और किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है?
- यदि अधिकारियों को बार-बार ‘संवेदनशीलता और जवाबदेही’ की सीख देनी पड़ रही है, तो क्या इसका मतलब यह नहीं कि जमीनी स्तर पर जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा?
