सक्ति; 411 शिकायतें, 287 समाधान… सुशासन की रफ्तार या बाकी 124 सवालों का इंतजार? Aajtak24 News

सक्ति; 411 शिकायतें, 287 समाधान… सुशासन की रफ्तार या बाकी 124 सवालों का इंतजार? Aajtak24 News

सक्ति - सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और ग्रामीणों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान करने के उद्देश्य से आयोजित सुशासन तिहार 2026 के तहत मालखरौदा विकासखंड की ग्राम पंचायत फगुरम में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में प्रशासन ने एक ही स्थान पर कई विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराकर त्वरित समाधान का प्रयास किया।

क्लस्टर स्तर पर आयोजित इस शिविर में 19 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने अपनी मांगों, शिकायतों और योजनाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर कुल 411 आवेदन प्रस्तुत किए। इनमें से 287 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि 124 मामलों को आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य लोगों को कार्यालयों के चक्कर से बचाना और योजनाओं का लाभ सीधे गांव स्तर पर उपलब्ध कराना है।

शिविर के दौरान कई हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। खाद्य विभाग द्वारा राशन कार्ड, स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयुष्मान कार्ड, समाज कल्याण विभाग द्वारा मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल और श्रवण यंत्र, कृषि विभाग द्वारा नील हरित काई, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति पत्र एवं प्रतीकात्मक चाबी प्रदान की गई। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों को बैंक लिंकेज सहायता, शिक्षा विभाग द्वारा गणवेश वितरण और मत्स्य पालन विभाग द्वारा जाल वितरण भी किया गया।

शिविर में स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विभाग ने स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया। वहीं विभिन्न विभागों ने अपने-अपने स्टॉलों के माध्यम से नागरिकों को योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, राजस्व, बिजली, आवास, जल संसाधन, श्रम और अन्य विभागों की भागीदारी रही। हालांकि मौके पर बड़ी संख्या में आवेदन निपटाए गए, लेकिन प्रशासन की असली परीक्षा अब उन 124 लंबित आवेदनों के समाधान की समयसीमा और गुणवत्ता पर होगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिन 124 आवेदनों का मौके पर समाधान नहीं हुआ, उनके लिए विभागवार तय समयसीमा और सार्वजनिक मॉनिटरिंग व्यवस्था क्या है?

2. पिछले सुशासन शिविरों में लाभान्वित हितग्राहियों का क्या फॉलो-अप किया गया कि योजनाओं का वास्तविक लाभ उन्हें मिला या नहीं?

3. शिविर आधारित समाधान मॉडल के बाद क्या ग्रामीणों को नियमित सेवाएं भी उतनी ही आसानी से उपलब्ध हो रही हैं, या समस्याएं फिर से लंबित हो जाती हैं?

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