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| सक्ति; अब मनमर्जी से नहीं मिलेगा खाद! खरीफ 2026 के लिए बदला नियम, जमाखोरी पर प्रशासन की सख्ती Aajtak24 News |
सक्ति - खरीफ सीजन 2026 से पहले किसानों के लिए उर्वरक वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। इस बार कृषि विभाग ने खाद वितरण को अधिक नियंत्रित, पारदर्शी और संतुलित बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे जमाखोरी पर रोक लगेगी और जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगी। कृषि विभाग के अनुसार नई व्यवस्था के तहत किसानों को मिलने वाली खाद की मात्रा अब केवल मांग के आधार पर नहीं बल्कि पिछले खरीफ सीजन 2025 में प्राप्त उर्वरक के रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाएगी। नई व्यवस्था में किसानों को शुरुआती चरण में पिछले वर्ष प्राप्त यूरिया की कुल मात्रा का 80 प्रतिशत पारंपरिक यूरिया दिया जाएगा। शेष 20 प्रतिशत उपलब्धता के अनुसार वितरित किया जाएगा और आवश्यकता होने पर उसके स्थान पर नैनो यूरिया का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
इसी तरह डीएपी की आपूर्ति पिछले वर्ष की मात्रा के केवल 60 प्रतिशत तक सीमित रखी गई है। बाकी आवश्यकता को वैकल्पिक एनपीके खाद या नैनो डीएपी के माध्यम से पूरा करने की योजना बनाई गई है। कृषि विभाग का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल वितरण नियंत्रित करना नहीं बल्कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करना और भूमि की उर्वरा क्षमता बनाए रखना भी है। किसानों को जैव उर्वरक, हरी खाद और अन्य विकल्पों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
नई व्यवस्था में बड़े किसानों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों को यूरिया तीन किस्तों में मिलेगा और प्रत्येक किस्त के बीच 20 दिन का अंतर रखा जाएगा। वहीं 2.5 से 5 एकड़ वाले किसानों को दो चरणों में खाद दी जाएगी और सीमांत किसानों को तय मात्रा एकमुश्त उपलब्ध कराई जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी लेना पूरी तरह वैकल्पिक होगा, किसी किसान को इसके लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
साथ ही चेतावनी दी गई है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत खाद का उपयोग केवल कृषि कार्यों के लिए ही मान्य होगा। अवैध भंडारण या गैर-कृषि उपयोग पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि नई व्यवस्था का उद्देश्य समान वितरण बताया जा रहा है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या इससे किसानों की वास्तविक जरूरत पूरी होगी या आपूर्ति का दबाव बढ़ेगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिन किसानों की इस वर्ष खेती का रकबा बढ़ा है लेकिन पिछले वर्ष कम खाद ली थी, उनके लिए अतिरिक्त मांग का समाधान कैसे होगा?
2. डीएपी की मात्रा घटाकर वैकल्पिक खाद देने की नीति के प्रभाव का स्थानीय स्तर पर कोई वैज्ञानिक आकलन किया गया है?
3. जमाखोरी रोकने के लिए वितरण नियम तो बदले गए हैं, लेकिन कालाबाजारी और फर्जी बिक्री रोकने के लिए निगरानी तंत्र क्या होगा?
