296 आवेदन, 123 का मौके पर समाधान… लहंगा में ‘सुशासन तिहार’ बना जनता की सीधी सुनवाई का मंच Aajtak24 News

296 आवेदन, 123 का मौके पर समाधान… लहंगा में ‘सुशासन तिहार’ बना जनता की सीधी सुनवाई का मंच Aajtak24 News

सक्ती - जिले में मुख्यमंत्री की मंशानुरूप “सुशासन तिहार 2026” के तहत जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की मुहिम लगातार तेज हो रही है। इसी क्रम में जनपद पंचायत सक्ती अंतर्गत ग्राम भाटापारा उद्यान लहंगा में जनसमस्या समाधान शिविर का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी देखने को मिली। शिविर में 20 ग्राम पंचायतों से आए ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और मांगों से जुड़े कुल 296 आवेदन प्रस्तुत किए। इनमें से 123 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष आवेदनों को संबंधित विभागों को भेजकर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया।

कार्यक्रम में कलेक्टर ने कहा कि “सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन को जनता के द्वार तक ले जाना है, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समस्याओं का समाधान उनके गांव में ही हो सके। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि यह अभियान केवल शिकायतों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य हर पात्र हितग्राही तक शासन की योजनाओं की जानकारी और लाभ पहुंचाना भी है।

शिविर के दौरान कई हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ भी दिया गया। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृति पत्र और आवास की चाबी, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, जॉब कार्ड और बिहान समूह की महिलाओं को आजीविका संवर्धन चेक शामिल रहे। स्वास्थ्य और आयुष विभाग द्वारा शिविर में आए लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया। वहीं विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी दी और लोगों को जागरूक किया।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास, कृषि, पंचायत, स्वास्थ्य, राजस्व, श्रम, पशुधन, जल संसाधन, बिजली, खाद्य, आदिवासी विकास सहित कई विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। शिविर में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने की शपथ दिलाई।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 296 में से केवल 123 आवेदनों का ही मौके पर निराकरण हुआ, बाकी 173 मामलों की स्पष्ट समय-सीमा और जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?
  2. क्या सुशासन तिहार जैसे शिविरों के बाद भी लंबित शिकायतों का वास्तविक फॉलोअप सुनिश्चित करने के लिए कोई निगरानी प्रणाली है या यह केवल एक औपचारिकता है?
  3. जिन हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिला, क्या उनके चयन और पात्रता की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑडिट योग्य है?


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