दमोह में गैस माफियाओं पर प्रशासन का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 20 एजेंसियों पर एक साथ छापा Aajtak24 News

दमोह में गैस माफियाओं पर प्रशासन का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 20 एजेंसियों पर एक साथ छापा Aajtak24 News

दमोह - जिले में घरेलू गैस वितरण व्यवस्था में चल रही गड़बड़ियों पर प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ 20 गैस एजेंसियों पर छापामार जांच की। इस संयुक्त कार्रवाई में 15 एजेंसियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक उपलब्ध सिलेंडरों में 2138 सिलेंडरों का अंतर मिला, जिससे गैस वितरण व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि उपभोक्ताओं से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गैस एजेंसियां समय पर सिलेंडर नहीं दे रहीं, निर्धारित दर से अधिक राशि वसूल रही हैं और वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने रातों-रात रणनीति तैयार की और सुबह 10 बजे जिलेभर की सभी 20 एजेंसियों पर एक साथ जांच शुरू कराई।

कार्रवाई के लिए 21 अलग-अलग जांच दल बनाए गए थे, ताकि किसी एजेंसी को पहले से भनक न लग सके। वहीं उज्ज्वला योजना के कार्डों के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए एक विशेष टीम भी गठित की गई थी।

जांच के दौरान तेंदूखेड़ा के 27 मील स्थित महावीर हार्डवेयर ट्रेडर्स पर सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यहां से 23 गैस कार्ड जब्त किए गए, जिनमें 22 प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कार्ड और एक सामान्य गैस कनेक्शन कार्ड शामिल था। प्रशासन का मानना है कि ये कार्ड वास्तविक हितग्राहियों के पास होने चाहिए थे, लेकिन निजी कब्जे में पाए जाने से आशंका है कि इनके जरिए गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही थी।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि यदि अलग-अलग एजेंसियों पर कार्रवाई की जाती तो बाकी संचालकों को सूचना मिल जाती और वे रिकॉर्ड दुरुस्त कर लेते। इसलिए पहली बार जिले में सभी एजेंसियों पर एक साथ जांच कराई गई, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन एजेंसियों में गड़बड़ी मिली है, उनके खिलाफ द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस प्रदाय आदेश 2000 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि गरीब उपभोक्ताओं के हक पर डाका डालने, अधिक कीमत वसूलने या नियमों के विरुद्ध सिलेंडर वितरण करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अब विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंस निरस्तीकरण, एफआईआर और अन्य कठोर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद जिले की गैस एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. 2138 सिलेंडरों का अंतर मिला है, क्या प्रशासन यह मान रहा है कि जिले में लंबे समय से गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी संगठित तरीके से चल रही थी, और यदि हां तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  2. उज्ज्वला योजना के 22 कार्ड निजी कब्जे में मिले हैं, क्या प्रशासन यह जांच करेगा कि गरीब हितग्राहियों के नाम पर मिलने वाले सिलेंडर आखिर किन लोगों तक पहुंच रहे थे?
  3. यदि उपभोक्ताओं की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो प्रशासन ने इतनी बड़ी संयुक्त कार्रवाई करने में इतना समय क्यों लगाया, और क्या इससे पहले की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित नहीं हुई?

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