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| आलीराजपुर; 23 आवेदन और सबसे बड़ा सवाल—आज भी पानी और पेंशन के लिए जनसुनवाई क्यों? Aajtak24 News |
आलीराजपुर - जिले में आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित जनसुनवाई कक्ष में साप्ताहिक जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती संघमित्रा गौतम ने नागरिकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को जांच कर समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। आज की जनसुनवाई में कुल 23 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें पेयजल, पेंशन, अतिक्रमण, पीएम आवास, सीमांकन और भूमि विवाद जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
जनसुनवाई के दौरान ग्राम छोटी उतावली, तहसील सोण्डवा के ग्रामीणों ने सामूहिक आवेदन देकर बताया कि उनके फलिया में एक भी हैंडपंप उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार पेयजल के लिए उन्हें लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कुएं पर निर्भर रहना पड़ता है, जो गर्मी के मौसम में सूख जाता है। इससे विशेष रूप से महिलाओं को तेज गर्मी में लंबी दूरी तय कर पानी लाने की परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने शासन की योजना के तहत नए हैंडपंप खनन की मांग की।
इसी तरह ग्राम लक्ष्मणी और ग्राम आम्बी धानुक फलिया सहित अन्य क्षेत्रों के ग्रामीणों ने भी पेयजल संकट और हैंडपंप खनन से जुड़े आवेदन प्रस्तुत किए। इस पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने संबंधित आवेदनों को पीएचई विभाग को भेजते हुए जांच और शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए।
जनसुनवाई में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक मामला भी सामने आया। चंद्रशेखर आजाद मार्ग, आलीराजपुर निवासी श्रीमती मंजुला गोस्वामी ने आवेदन देकर बताया कि पति की मृत्यु के कई वर्ष बाद भी उन्हें विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने शासकीय योजना के तहत पेंशन स्वीकृत करने की मांग की। मामले पर संबंधित अधिकारियों को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा भूमि पर कब्जा, अतिक्रमण, पीएम आवास योजना, बंटवारा, सीमांकन और पेयजल से जुड़े अन्य आवेदन भी प्राप्त हुए। जनसुनवाई में संयुक्त कलेक्टर मनोज गरवाल, डिप्टी कलेक्टर निर्मला कलमे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. यदि गांवों में आज भी हैंडपंप जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित विभाग की पूर्व योजना और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही?
2. कई वर्ष बाद भी विधवा पेंशन नहीं मिलने की शिकायत आई—क्या जिले में लंबित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की कोई सार्वजनिक समीक्षा होती है?
3. जनसुनवाई में हर सप्ताह पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की शिकायतें आ रही हैं—क्या प्रशासन ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर स्वतः कार्रवाई करेगा या नागरिकों को आवेदन देना ही पड़ेगा?
