बड़वानी; जनसुनवाई में उठे सड़क सुरक्षा से लेकर बेटी की पढ़ाई तक के सवाल: कलेक्टर ने दिए तत्काल निर्देश Aajtak24 News

बड़वानी; जनसुनवाई में उठे सड़क सुरक्षा से लेकर बेटी की पढ़ाई तक के सवाल: कलेक्टर ने दिए तत्काल निर्देश Aajtak24 News

बड़वानी - आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय बड़वानी में जिला स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 57 आवेदकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समय-सीमा में प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई में सामने आए मामलों में सड़क सुरक्षा, शिक्षा और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का केवल निस्तारण नहीं बल्कि ऐसा समाधान किया जाए जिससे लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

जनसुनवाई के दौरान ग्राम लिंगवा निवासी सुदामा जायसवाल ने आवेदन देकर बताया कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनी पिपरी–कुसमरी सड़क के दोनों ओर पटरी नहीं भरी गई है, जिससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभाग को आवेदन भेजकर स्थल परीक्षण और शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।

वहीं शिक्षा से जुड़ा एक संवेदनशील मामला भी जनसुनवाई में सामने आया। ग्राम लिम्बई निवासी सुनिल पिता रायसिंग भीलाला ने आवेदन देकर बताया कि उनकी पुत्री मीनाक्षी मुजाल्दे ने कक्षा 10वीं में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल और छात्रावास में प्रवेश दिलाने में कठिनाई हो रही है।

इस पर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग को निर्देश दिए कि छात्रा को कक्षा 11वीं में प्रवेश और छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए ताकि उसकी शिक्षा बाधित न हो। जनसुनवाई में प्रशासन ने संकेत दिए कि बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा जैसे विषयों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनी सड़क की पटरी यदि अधूरी है और दुर्घटना का खतरा बना हुआ है, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

2. छात्रावास और स्कूल प्रवेश जैसी मूलभूत जरूरत के लिए परिवार को जनसुनवाई तक क्यों आना पड़ा—क्या पात्र छात्रों की पहचान और सहायता की कोई सक्रिय व्यवस्था नहीं है?

3. 57 आवेदन प्राप्त हुए—क्या जिला प्रशासन इनके निराकरण की प्रगति सार्वजनिक पोर्टल या रिपोर्ट के माध्यम से आम नागरिकों के सामने रखेगा?

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