सरकार अब गांव-गांव पहुंची: ‘सुशासन तिहार’ में शिकायतों की लाइनें, राहत की रफ्तार Aajtak24 News

सरकार अब गांव-गांव पहुंची: ‘सुशासन तिहार’ में शिकायतों की लाइनें, राहत की रफ्तार Aajtak24 News

रायपुर - छत्तीसगढ़ में सुशासन की अवधारणा को जमीनी स्तर पर लागू करने के उद्देश्य से “सुशासन तिहार 2026” का प्रदेशव्यापी शुभारंभ 1 मई से किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 जून तक चलने वाला यह अभियान शासन और जनता के बीच दूरी कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।अभियान के पहले ही दिन राज्य के विभिन्न जिलों में जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया गया, जहां मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी स्वयं उपस्थित होकर लोगों की समस्याएं सुनते नजर आए।

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम रिसदा में आयोजित शिविर में 573 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें लगभग 47 प्रतिशत का मौके पर ही निराकरण किया गया। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी आवेदनों का समयबद्ध और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। कोरबा जिले के ग्राम धनरास में 332 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 103 मामलों का तत्काल समाधान किया गया। वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि यह अभियान शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड के ग्राम कठिया में आयोजित शिविर में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की मौजूदगी में कई हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिया गया। यहां महिलाओं को मनरेगा जॉब कार्ड और दिव्यांग हितग्राही को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई। विभिन्न शिविरों में आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, केसीसी ऋण, उज्ज्वला योजना और कृषि उपकरण जैसी सेवाएं मौके पर ही उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाएं भी ग्रामीणों को दी गईं, जिससे उन्हें त्वरित राहत मिली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं इस पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाएगी। सरकार का दावा है कि यह पहल प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनता के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सीधे सवाल

  1. क्या पहले से लंबित हजारों शिकायतों का यह त्वरित समाधान वास्तव में स्थायी होगा, या शिविर खत्म होते ही प्रक्रिया फिर धीमी पड़ जाएगी?
  2. मौके पर 40–50% निराकरण के बाद बाकी मामलों के समाधान की स्पष्ट समयसीमा और निगरानी व्यवस्था क्या तय की गई है?
  3. क्या इस अभियान के बाद भी गांव स्तर पर नियमित शिकायत निवारण प्रणाली सक्रिय रहेगी, या यह सिर्फ एक सीमित अवधि का विशेष अभियान है?

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