सागर; 20 मई के बाद खाली होंगे गांव: बंडा बांध के लिए प्रशासन का अल्टीमेटम Aajtak24 News

सागर; 20 मई के बाद खाली होंगे गांव: बंडा बांध के लिए प्रशासन का अल्टीमेटम Aajtak24 News

सागर - बंडा वृहद (उल्दन) सिंचाई परियोजना को लेकर अब प्रशासन पूरी तरह मिशन मोड में आ गया है। जून माह में बांध का जलभराव शुरू होने से पहले डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों को खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने साफ निर्देश दिए हैं कि 20 मई से प्रभावित परिवारों को विस्थापन कॉलोनियों में सुरक्षित शिफ्ट किया जाए। इसके साथ ही डूब क्षेत्र में मौजूद स्कूल, आंगनबाड़ी, थाना और अस्पताल जैसे सभी शासकीय भवनों को आगामी तीन दिनों के भीतर डिस्मेंटल करने के आदेश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि विस्थापन प्रक्रिया संवेदनशीलता और समझाइश के साथ पूरी की जाएगी, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात रहेगा। पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया ने गुरुवार से प्रभावित गांवों में अतिरिक्त पुलिस बल भेजने और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को ग्रामीणों को समझाकर स्वेच्छा से विस्थापन के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया है।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नई विस्थापन कॉलोनियों में पानी, बिजली, स्कूल, चिकित्सा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाएं। केवल लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों के पशुओं के लिए भी विशेष इंतजाम करने को कहा गया है। प्रशासन ने चारागाह और चारा भूमि की व्यवस्था प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने मुआवजा और कानूनी मामलों के समाधान के लिए भी विशेष रणनीति बनाई है। एडीएम और एसडीएम स्तर पर विशेष सेल गठित किया गया है, जो सप्ताह के सातों दिन कार्य करेगा। जिन ग्रामीणों को भू-अर्जन की राशि नहीं मिली है या जिनके मामले आर्बिट्रेशन में लंबित हैं, उनके दस्तावेज लेकर शिविरों में मौके पर ही समाधान करने की बात कही गई है। एसडीएम और एसडीओपी को 20 मई तक लगातार गांवों में कैंप लगाने और लोगों की समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए गए हैं।

दरअसल, बंडा वृहद सिंचाई परियोजना को बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। करीब 3219 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से सागर जिले की बंडा, शाहगढ़ और मालथौन तहसील सहित छतरपुर जिले की बक्सवाहा तहसील के किसानों को बड़ा लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है। परियोजना से कुल 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे हजारों किसानों की खेती की तस्वीर बदलने की उम्मीद है।

परियोजना के तहत बंडा तहसील में 35 हजार हेक्टेयर से अधिक, मालथौन में 16 हजार हेक्टेयर, बक्सवाहा में 13 हजार हेक्टेयर और शाहगढ़ में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी। इसके अलावा 412 गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने और सौरई औद्योगिक क्षेत्र को भी पानी देने की योजना है।

प्रशासन के अनुसार बांध निर्माण का लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कंक्रीट स्ट्रक्चर का 90 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है और पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी तेजी से जारी है। विभाग ने जून 2026 तक बांध निर्माण और दिसंबर 2026 तक पूरी पाइप प्रणाली के साथ परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि, विकास और विस्थापन के बीच संतुलन को लेकर अब कई सवाल भी उठने लगे हैं। एक तरफ सरकार इसे क्षेत्र की सबसे बड़ी सिंचाई क्रांति बता रही है, तो दूसरी तरफ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और भविष्य को लेकर चिंता भी सामने आने लगी है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. क्या प्रशासन यह गारंटी देगा कि 20 मई तक विस्थापित किए जाने वाले सभी परिवारों को मुआवजा, जमीन और मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध करा दी जाएंगी, या लोगों को अधूरी कॉलोनियों में भेजा जाएगा?
  2. डूब क्षेत्र के स्कूल, अस्पताल और सरकारी भवन तीन दिन में तोड़े जाने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन क्या वहां रहने वाले लोगों की सहमति और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है?
  3. परियोजना से 80 हजार हेक्टेयर सिंचाई का दावा किया जा रहा है, लेकिन जिन परिवारों की पीढ़ियों की जमीन डूब में जा रही है, उनके स्थायी रोजगार और आजीविका के लिए सरकार की दीर्घकालिक योजना क्या है?

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