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| बालाघाट में नगरीय निकायों की बैठक में कलेक्टर का सख्त संदेश, अमृत 2.0 पर फोकस बढ़ा Aajtak24 News |
बालाघाट - जिले में नगरीय विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और स्वच्छता रैंकिंग को लेकर कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने सख्त रुख अपनाया है। बालाघाट, वारासिवनी, मलाजखंड, बैहर, कटंगी और लांजी नगर निकायों की समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अब “केवल रिपोर्ट नहीं, परिणाम दिखने चाहिए। बैठक में स्वच्छता, जल आपूर्ति, अमृत 2.0 और आवास योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से समीक्षा की गई।
स्वच्छता रैंकिंग पर सीधी चेतावनी
कलेक्टर ने कहा कि इस वर्ष सभी निकायों को अपनी रैंकिंग पिछले वर्ष से बेहतर करनी ही होगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि—
- स्वच्छता केवल अभियान नहीं, नियमित प्रक्रिया बने
- सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती से रोक लगाई जाए
- कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित हो
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ निकायों में तैयारी पूरी है, लेकिन कई जगह काम अभी अधूरा है।
अमृत 2.0 में धीमी प्रगति पर नाराजगी
अमृत 2.0 योजना की समीक्षा के दौरान पाया गया कि—
- बालाघाट में कार्य प्रगति असंतोषजनक है
- कटंगी और लांजी में कार्य अभी शुरू भी नहीं हुआ
इस पर कलेक्टर ने सभी सीएमओ को निर्देश दिए कि जल आपूर्ति योजनाओं को प्राथमिकता देकर जल्द पूरा किया जाए, ताकि गर्मी और बारिश के दौरान नागरिकों को परेशानी न हो।
मानसून से पहले तैयारी के निर्देश
बरसात से पहले नालियों और नालों की सफाई पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि—
- जलभराव की स्थिति किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए
- सभी नालों की सफाई समय पर पूरी हो
- जल निकासी व्यवस्था मजबूत की जाए
आवास और श्रमिक योजनाओं पर फोकस
बैठक में आवास योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि—
- निर्मित आवास शीघ्र हितग्राहियों को सौंपे जाएं
- पीएम स्वनिधि योजना के पात्र लाभार्थियों को लाभ मिले
- श्रमिकों का पीएम श्रमयोगी मानधन योजना में पंजीयन अनिवार्य रूप से किया जाए
ग्रीन एरिया और तालाबों के विकास पर जोर
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कलेक्टर ने निर्देश दिए कि—
- हर नगरीय निकाय में ग्रीन एरिया विकसित किया जाए
- प्रत्येक क्षेत्र में कम से कम दो तालाबों का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार हो
बालाघाट की यह बैठक साफ संकेत देती है कि नगरीय विकास कार्यों में अब “धीमी प्रगति” स्वीकार नहीं की जाएगी। स्वच्छता रैंकिंग से लेकर जल आपूर्ति और आवास योजनाओं तक—हर मोर्चे पर प्रशासन अब परिणाम आधारित निगरानी पर उतर आया है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- स्वच्छता सर्वेक्षण में सुधार के निर्देश हर साल दिए जाते हैं, लेकिन क्या किसी निकाय की लगातार खराब रैंकिंग पर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई तय की गई है?
- अमृत 2.0 योजना में कुछ निकायों में काम शुरू ही नहीं हुआ—इसके लिए प्रशासनिक देरी जिम्मेदार है या ठेकेदार प्रणाली की विफलता?
- निर्मित आवासों के बावजूद हितग्राहियों को समय पर आवंटन न मिलने की समस्या बार-बार क्यों सामने आती है और इसमें वास्तविक बाधा कहां है?
