![]() |
| मनेन्द्रगढ़; 19 पंचायतों की समस्याएं एक मंच पर, बड़वाही शिविर में अधिकारियों ने किया सीधा समाधान Aajtak24 News |
मनेन्द्रगढ़ - छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिला के विकासखंड भरतपुर के ग्राम बड़वाही में आयोजित पहला जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर “संवाद से संपूर्ण समाधान” जनआस्था का केंद्र बन गया। यह आयोजन राज्य सरकार की “सुशासन तिहार 2026” पहल के तहत किया गया, जिसमें 19 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। शिविर का शुभारंभ जनप्रतिनिधियों द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। सुबह से ही दूर-दराज के गांवों से ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर शिविर स्थल पर पहुंचने लगे, जिससे पूरे परिसर में भीड़ और उत्साह का माहौल बना रहा। शिविर में विभिन्न विभागों के माध्यम से कुल 422 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से कई मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष आवेदनों को निर्धारित समयसीमा में निपटाने के लिए संबंधित विभागों को सौंपा गया। राशन कार्ड, आधार कार्ड, श्रम कार्ड और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े कार्य भी मौके पर संपन्न किए गए।
कार्यक्रम में अपर कलेक्टर नम्रता डोंगरे की उपस्थिति रही। उनके साथ एसडीएम भरतपुर शशिशेखर मिश्रा, जनपद सीईओ अजय सिंह राठौर और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण कर त्वरित और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शिविर में श्रम, खाद्य, मनरेगा, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पुलिस, बिजली, जल संसाधन और राजस्व सहित कई विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को ग्रामीणों के लिए लाभकारी बताते हुए इसे प्रशासन और जनता के बीच मजबूत संवाद का माध्यम बताया। जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह ने इसे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम कहा, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे सुशासन की प्रभावी मिसाल बताया।
अपर कलेक्टर नम्रता डोंगरे ने कहा कि यह शिविर केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि शासन की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसमें प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- 422 आवेदनों में कितने मामलों का वास्तविक “स्थायी समाधान” हुआ और कितने सिर्फ दर्ज कर आगे बढ़ा दिए गए?
- ऐसे शिविरों के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत समस्याएं बार-बार क्यों लौट आती हैं—क्या फॉलोअप सिस्टम कमजोर है?
- मौके पर समाधान का दावा तो होता है, लेकिन क्या इसकी कोई स्वतंत्र मॉनिटरिंग या ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है?

