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| बैतूल; जंगल के गांव में लगा ‘स्वास्थ्य दरबार’: चिरापाटला शिविर में 160 मरीजों का इलाज Aajtak24 News |
बैतूल - दूरस्थ आदिवासी अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से बैतूल जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चिरापाटला में आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर में बुधवार को 160 मरीजों का उपचार किया गया। जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार की स्वीकृति से जिले में लगाए जा रहे 20 स्वास्थ्य शिविरों की श्रृंखला के तहत यह शिविर आयोजित किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीजों की जांच कर उपचार उपलब्ध कराया।
स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण करने स्वयं कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे पहुंचे। उन्होंने शिविर में पंजीयन व्यवस्था, मरीजों की जांच प्रक्रिया और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बीपी, शुगर, सिकलसेल जांच सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी सीधे हितग्राहियों से ली। उन्होंने मरीजों से चर्चा कर यह समझने की कोशिश की कि उन्हें स्वास्थ्य सुविधाओं का वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं।
कलेक्टर ने शिविर में पहुंची महिला हितग्राही प्रियंका उइके से जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बातचीत की और उन्हें दिए जा रहे कार्ड व अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बीएमओ डॉ. अभिनव शुक्ला को स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने बताया कि शिविर का शुभारंभ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया। शिविर में जिला अस्पताल से पहुंचे स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ और मानसिक रोग विशेषज्ञों ने मरीजों का परीक्षण कर उपचार दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य और सिकलसेल जैसी बीमारियों की जांच को विशेष प्राथमिकता दी गई।
शिविर में स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम भी सक्रिय रही। बीईई, बीपीएम, सीएचओ, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य जागरूकता और योजनाओं की जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी कि 15 मई 2026 को मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक, वार्ड क्रमांक 14 पाथाखेड़ा में अगला स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। सीएमएचओ ने जिले के लोगों से इन शिविरों का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की है। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को देखते हुए ऐसे शिविर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती भी हैं और उम्मीद भी। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन शिविरों के जरिए कितने मरीजों को स्थायी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाती हैं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- एक दिन के शिविर में 160 मरीजों का इलाज हुआ, लेकिन क्या गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के फॉलोअप और नियमित उपचार की कोई स्थायी व्यवस्था भी बनाई गई है?
- सिकलसेल और मानसिक रोग जैसी गंभीर समस्याओं की जांच की गई, लेकिन क्या जिले के आदिवासी क्षेत्रों में इन बीमारियों के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ और दवाइयां स्थायी रूप से उपलब्ध हैं?
- स्वास्थ्य शिविरों को सफल बताया जा रहा है, लेकिन क्या प्रशासन यह स्वीकार करता है कि नियमित स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ही ग्रामीणों को अस्थायी शिविरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है?
