इंदौर; स्कूल की उम्र में गैराज की मजदूरी… इंदौर में 13 साल का बच्चा बालश्रम करते मिला Aajtak24 News

इंदौर; स्कूल की उम्र में गैराज की मजदूरी… इंदौर में 13 साल का बच्चा बालश्रम करते मिला Aajtak24 News

इंदौर - इंदौर में बालश्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 वर्षीय बालक को बालश्रम से मुक्त कराया। द्वारकापुरी क्षेत्र में की गई संयुक्त कार्रवाई के दौरान नाबालिग बच्चा एक गैराज पर काम करता हुआ मिला, जिसके बाद संबंधित नियोजक के खिलाफ श्रम कानून के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। यह कार्रवाई जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री रजनीश सिन्हा के निर्देश पर की गई। जांच के दौरान टीम ने पाया कि बच्चा कम उम्र में मजदूरी करने को मजबूर था। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए बालक को वहां से मुक्त कराया और उसे अभिरक्षा में लिया गया।

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र पण्ड्या के आदेश पर बालक को संस्था लोक बिरादरी ट्रस्ट अरमान, इंदौर में प्रवेश दिलाया गया, जहां उसकी देखभाल और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस संयुक्त कार्रवाई में महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, चाइल्ड लाइन, सामाजिक संस्थाओं और पुलिस विभाग की टीम शामिल रही। कार्रवाई में महिला एवं बाल विकास विभाग से श्री आशीष गोस्वामी, श्रम विभाग से श्री प्रवेश गुप्ता, चाइल्ड लाइन से श्री फूलसिंह कारपेंटर, संस्था आस से श्री राहुल गोठाने तथा थाना द्वारकापुरी का पुलिस बल मौजूद रहा।

प्रशासन का कहना है कि बालश्रम के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और बच्चों से मजदूरी कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह घटना एक बार फिर उस कड़वी सच्चाई को सामने लाती है कि कानूनन प्रतिबंध के बावजूद शहरों में अब भी कई बच्चे स्कूल की जगह गैराज, ढाबों और दुकानों में काम करने को मजबूर हैं। सवाल यह भी है कि आखिर प्रशासनिक निगरानी के बावजूद ऐसे मामलों का खुलासा केवल विशेष अभियान के दौरान ही क्यों होता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. बालश्रम पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद 13 वर्षीय बच्चा खुलेआम गैराज पर काम कर रहा था। आखिर स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग की नियमित निगरानी कहां थी?
  2. बालक को संरक्षण गृह भेज दिया गया, लेकिन क्या प्रशासन उसके परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति की भी जांच करेगा ताकि वह दोबारा बालश्रम करने को मजबूर न हो?
  3. इंदौर जैसे बड़े शहर में बालश्रम के खिलाफ लगातार अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं। फिर भी नाबालिग बच्चों से काम कराने वाले गैराज और दुकानदारों पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही?

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