विंध्य में डामर का 'काला' खेल; EOW ने 44 रसूखदारों पर कसा शिकंजा, करोड़ों की लूट उजागर Aajtak24 News

विंध्य में डामर का 'काला' खेल; EOW ने 44 रसूखदारों पर कसा शिकंजा, करोड़ों की लूट उजागर Aajtak24 News

रीवा - विंध्य की सड़कों पर बिछा डामर अब भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों के गले की फांस बन गया है। मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक ऐसी बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने मप्र ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के गहरे सिंडिकेट की परतें उधेड़ दी हैं। रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में फर्जी बिलों के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने वाले 44 बड़े चेहरों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

फर्जी इनवाइस से करोड़ों का 'मास्टर स्ट्रोक'

EOW की लंबी और गहन जांच में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि वर्ष 2017 से 2021 के बीच सड़कों के निर्माण में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गईं। आरोपियों ने बेहद शातिराना तरीके से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) के नाम से डामर खरीद के फर्जी इनवाइस (बिल) तैयार किए। सरकारी फाइलों में यह दर्शाया गया कि सड़कों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले डामर का इस्तेमाल किया गया है और इसके बदले करोड़ों रुपये का भुगतान भी ले लिया गया। जबकि असलियत में, डामर की वह मात्रा कभी खरीदी ही नहीं गई और घटिया सामग्री के सहारे सड़कें तैयार कर दी गईं।

घोटाले का खौफनाक गणित

यह घोटाला केवल कागजी हेरफेर नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे की खुली लूट है। जांच एजेंसी ने दो बड़ी इकाइयों में हुए फर्जीवाड़े का अलग-अलग ब्योरा पेश किया है:

  1. रीवा परियोजना इकाई: यहाँ लगभग 12.71 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान डामर के नाम पर डकारा गया।

  2. मऊगंज परियोजना इकाई: यहाँ डामर खरीद के नाम पर करीब 5.88 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 18 करोड़ रुपये से ऊपर जाता है, जो केवल डामर के फर्जीवाड़े से संबंधित है।

44 चेहरों से हटा नकाब: रसूखदारों में हड़कंप

EOW की इस कार्रवाई ने उन रसूखदारों की नींद उड़ा दी है जो अब तक खुद को कानून से ऊपर समझते थे। कुल 44 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।

  • रीवा इकाई के मुख्य नाम: ईओडब्ल्यू ने यहाँ से 27 लोगों को घेरे में लिया है। इनमें तत्कालीन महाप्रबंधक राजीव कुमार दवे, प्रबंधक कैलाश कुमार सोनी, जुगल किशोर गुप्ता, रामकुमार विचाती, नारायण त्रिपाठी, दिनेश कुमार शुक्ला और मुनि माधव मिश्रा जैसे अधिकारियों और बड़े ठेकेदारों के नाम शामिल हैं।

  • मऊगंज इकाई के मुख्य नाम: मऊगंज से 17 लोगों पर गाज गिरी है, जिनमें रामकुमार तिवारी, ए.के. सिंह और अमित कुमार गुप्ता जैसे संविदाकार शामिल हैं।

सड़कों की गुणवत्ता पर भी 'डाका'

सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला केवल पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है। फर्जी बिलों का मतलब सीधा है कि सड़कों में डामर की वह मात्रा लगी ही नहीं जिसके पैसे निकाले गए। यही कारण है कि विंध्य क्षेत्र की कई ग्रामीण सड़कें बनने के कुछ ही समय बाद उखड़ने लगीं। तकनीकी रूप से यह 'सरकारी हत्या' जैसा मामला है, जहाँ विकास की बुनियाद ही भ्रष्टाचार पर रखी गई।

भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस'

EOW की इस एफआईआर के बाद अब आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रबल संभावना है। विभाग के भीतर मचे हड़कंप के बीच यह माना जा रहा है कि जांच का दायरा अभी और बढ़ेगा। एजेंसी अब इन अधिकारियों और ठेकेदारों की बेनामी संपत्तियों की भी जांच कर सकती है। मुख्यमंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी पैसे की लूट करने वालों के लिए अब विंध्य में कोई जगह नहीं है।

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