| रीवा; विंध्य में सियासी भूचाल: नेताओं के साथ ‘उड़न खटोले’ से उतरी आपसी गुटबाजी, रीवा से कटनी तक दरारें हुईं सार्वजनिक Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया विंध्य दौरे के बाद समूचे क्षेत्र में राजनैतिक सरगर्मियां और कयासबाजियों का दौर चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां रीवा एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री का शासकीय प्रोटोकॉल के तहत आत्मीय और गरिमापूर्ण स्वागत हुआ, वहीं दूसरी तरफ राजनैतिक विश्लेषकों और जानकारों ने इस पूरे घटनाक्रम के अंतर्निहित संदेशों को भांप लिया है। सियासी गलियारों में यह चर्चा बेहद तेज है कि भोपाल से रीवा और फिर सतना तक नेताओं के साथ उड़न खटोले से आपसी गुटबंदी भी जमीन पर उतर आई है। इस हाई-प्रोफाइल मूवमेंट के बाद रीवा से लेकर कटनी तक फैली सियासी दरार के संकेत अब और गहरे होकर सार्वजनिक होने लगे हैं।
एयरपोर्ट पर जुटा विंध्य का नेतृत्व; शिष्टाचार के पीछे छिपी दूरियां
तय कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विशेष विमान द्वारा भोपाल से रीवा एयरपोर्ट पहुंचे। विमानतल पर उनकी अगवानी के लिए रीवा सांसद श्री जनार्दन मिश्र, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल तथा भाजपा जिला अध्यक्ष श्री वीरेंद्र गुप्ता मौजूद रहे, जिन्होंने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान संभाग और जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मुस्तैद दिखे।
परंतु, इस पूरे दौरे में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू वह था, जो कैमरे की चकाचौंध के पीछे चल रहा था। मुख्यमंत्री जी के साथ विशेष विमान में खजुराहो सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री बीडी शर्मा, सतना सांसद श्री गणेश सिंह और विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह भी भोपाल से एक साथ रीवा पहुंचे थे। हवाई पट्टी पर विंध्य के इन तमाम दिग्गजों की एक साथ मौजूदगी को भले ही ऊपरी तौर पर 'संगठनात्मक एकजुटता' के रूप में पेश करने की कोशिश की गई हो, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का साफ कहना है कि इस शक्ति प्रदर्शन में नेताओं के बीच की आपसी दूरियां और ठंडी बॉडी लैंग्वेज साफ बयां कर रही थी कि विंध्य भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
रीवा से कटनी तक सियासी दरार के मायने: एक विस्तृत विश्लेषण
मुख्यमंत्री के एयरपोर्ट पर संक्षिप्त ठहराव और फिर हेलीकॉप्टर (उड़न खटोले) द्वारा सतना के लिए उड़ान भरने के बाद, विंध्य और महाकौशल के इस संवेदनशील राजनैतिक बेल्ट में अंदरूनी कलह की परतें खुलने लगी हैं। इसके चार मुख्य केंद्र बिंदु उभरकर सामने आए हैं:
1. रीवा और सतना: 'पुराने बनाम नए' का तीव्र होता शीतयुद्ध
रीवा और सतना जिलों में राजनैतिक रसूख और वर्चस्व की अंदरूनी जंग अब किसी से छिपी नहीं है। 'मूल बनाम आयातित' और 'वरिष्ठ बनाम नए' चेहरों के बीच चल रही तनातनी अब खुलकर सतह पर आ रही है। शासकीय और संगठनात्मक कार्यक्रमों में अग्रिम पंक्ति में जगह पाने की होड़ मची है। सबसे बड़ा असंतोष जमीनी और समर्पित कार्यकर्ताओं में देखा जा रहा है, जिन्हें लगता है कि बड़े नेताओं की आपसी खींचतान में उनकी उपेक्षा हो रही है।
2. सीधी: संगठन और क्षत्रपों के बीच बढ़ता फासला
गुटबाजी की यह आंच केवल रीवा-सतना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर सीधी जिले में भी महसूस किया जा रहा है। सीधी में जिला संगठन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का भारी अभाव है। नेताओं द्वारा अपने-अपने गुटों को तरजीह दिए जाने के कारण जमीनी स्तर पर बिखराव की स्थिति बन रही है।
3. कटनी: महाकौशल के मुहाने पर रसूख की जंग
विंध्य से सटे महाकौशल के प्रवेश द्वार कटनी जिले में भी स्थितियां जुदा नहीं हैं। यहां स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पकड़ और राजनैतिक फैसलों में अपना एकाधिकार स्थापित करने के लिए दो बड़े धड़े आमने-सामने हैं। उड़न खटोले से उतरे दिग्गजों के इन दौरों के बाद यह उम्मीद थी कि दरारें कम होंगी, लेकिन इसके विपरीत गुटबाजी की खाई और चौड़ी होती नजर आ रही है।
नेतृत्व के सामने 'डैमेज कंट्रोल' की बड़ी चुनौती
राजनैतिक पंडितों और वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा की लगातार सक्रियता के बावजूद, क्षेत्रीय स्तर पर पनप रही इस अंतर्कलह को दबा पाना आसान नहीं होगा। एकजुटता के तमाम आधिकारिक दावों और तस्वीरों के बीच, विंध्य-महाकौशल बेल्ट का यह अंतर्विरोध आम कार्यकर्ताओं को असमंजस और हताशा में डाल रहा है।
तमाम कयासों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शीर्ष नेतृत्व समय रहते इस 'सियासी दरार' को भरने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर उड़न खटोले से उतरी यह गुटबाजी आने वाले चुनावों और संगठनात्मक फैसलों में कोई नया समीकरण खड़ा करेगी? इस पर पूरे प्रदेश के राजनैतिक विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं।