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| सीधी-अमिलिया घटना पर फूटा आक्रोश: सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग Aajtak24 News |
रीवा - सीधी जिले के अमिलिया क्षेत्र में घटित हालिया घटना को लेकर रीवा संभाग सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे सामाजिक ताने-बाने पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल मानवीय मूल्यों को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि संविधान द्वारा स्थापित समानता और न्याय के सिद्धांतों को भी कमजोर करती हैं।
संविधान सर्वोपरि, सभी नागरिक समान—समाज ने दोहराया मूल संदेश
समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान हर नागरिक को समान अधिकार और गरिमा प्रदान करता है। संविधान के निर्माण में जिन महापुरुषों का योगदान रहा, उनके प्रति देश का प्रत्येक नागरिक कृतज्ञ है। यही संविधान कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका—तीनों स्तंभों को दिशा देता है, जहां कानून की नजर में हर व्यक्ति समान है, चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या धर्म से संबंध रखता हो। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव या प्रताड़ना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह सामाजिक एकता के मूल भाव के खिलाफ भी है।
टूटता सामाजिक ताना-बाना: रिश्तों में बढ़ती दूरी पर चिंता
वक्ताओं ने समाज में तेजी से बढ़ रहे विघटन पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक समय था जब गांवों और समाज में आपसी भाईचारा, अपनापन और पारिवारिक संबंधों की मजबूत परंपरा थी। लोग एक-दूसरे को काका, दादा, बाबा भाई बहन चाचा चाची जैसे आत्मीय संबोधनों से बुलाते थे और हर सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे।लेकिन वर्तमान दौर में यह आत्मीयता कमजोर पड़ती जा रही है। अब समाज के भीतर ही जाति, वर्ग और धर्म के नाम पर खाई बढ़ती जा रही है। गांवों का अमन-चैन और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है, जिससे तनाव और टकराव की स्थिति बन रही है।
राजनीतिक ध्रुवीकरण बना बड़ी वजह, समाज को बांटने की साजिश
समाजसेवियों ने आरोप लगाया कि वर्तमान में कुछ राजनीतिक शक्तियां वोट बैंक की राजनीति के तहत समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं। यह ध्रुवीकरण सामाजिक समरसता को कमजोर कर रहा है और लोगों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के जागरूक और जिम्मेदार लोगों को अब आगे आकर इस विभाजनकारी सोच का विरोध करना होगा और एकजुट होकर ऐसे तत्वों को करारा जवाब देना होगा।
अन्याय के खिलाफ संघर्ष का ऐलान: संजय पांडे
इस मुद्दे पर समाजसेवी संजय पांडे ने स्पष्ट और मुखर रुख अपनाते हुए कहा कि वे किसी भी जाति विशेष के विरोधी नहीं हैं, लेकिन यदि किसी भी व्यक्ति के साथ जातिगत आधार पर अन्याय या उत्पीड़न किया जाता है, तो वे उसके खिलाफ हर संभव संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा, “सीधी-अमिलिया की घटना अत्यंत निंदनीय है। ऐसे कृत्य समाज को तोड़ने का काम करते हैं। यदि समाज में शांति और भाईचारा नहीं रहेगा, तो विकास की कोई भी योजना धरातल पर सफल नहीं हो सकती।”
प्रशासन से सख्ती की मांग, दोषियों पर कार्रवाई जरूरी
समाज के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश सरकार, रीवा संभाग प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों से मांग की है कि इस प्रकार की घटनाओं में शामिल दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए, चाहे वे किसी भी प्रभाव या वर्ग से जुड़े हों। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का भय और न्याय की निष्पक्षता ही समाज में विश्वास कायम कर सकती है। यदि प्रशासन समय रहते सख्त कदम नहीं उठाता, तो ऐसी घटनाएं समाज में अस्थिरता और अशांति को बढ़ावा देंगी।
एकता और शांति ही विकास की नींव
अंत में समाजसेवियों ने एक स्वर में कहा कि किसी भी गांव, समाज या देश के विकास की आधारशिला शांति, एकता और आपसी विश्वास होती है। यदि यह आधार कमजोर हो जाता है, तो विकास की सारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं। सीधी-अमिलिया की घटना ने एक बार फिर समाज और प्रशासन दोनों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब समय आ गया है जब विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हुआ जाए, ताकि समाज में फिर से सौहार्द, भाईचारा और विश्वास का वातावरण स्थापित किया जा सके।

