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| रीवा-मऊगंज में 'साक्ष्य के अभाव' की आड़ में बेखौफ अवैध कारोबार; क्या आदेशों को ठेंगा दिखा रहे बीट प्रभारी? Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - पुलिस प्रशासन भले ही अपराध मुक्त समाज के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन रीवा और मऊगंज जिले की जमीनी हकीकत इन दावों पर सवालिया निशान लगा रही है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में ताश, जुआ, सट्टा और प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप (कोरेक्स) के साथ गांजे का काला कारोबार फल-फूल रहा है। हालिया जानकारी के अनुसार, गढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम गंभीरपुर और लौरी इन गतिविधियों के नए केंद्र बन गए हैं।
साक्ष्य का संकट: गवाही बदलने का 'सेवा शुल्क'
क्षेत्र में सबसे बड़ी बाधा 'साक्ष्य' को बताया जा रहा है। आम नागरिक कोर्ट-कचहरी और अपराधियों से दुश्मनी के डर से गवाह बनने से कतराते हैं। सूत्रों का दावा है कि इस मौन सहमति के पीछे विभाग को मिलने वाला 'फायदा' एक बड़ी वजह है। थानों के चक्कर लगाने वाले बिचौलिए गवाही बदलवाने के नाम पर 10 से 20 हजार रुपये तक का 'सेवा शुल्क' वसूल रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 70% मामलों में गवाह कोर्ट पहुँचते-पहुँचते अपनी बात से पलट जाते हैं, जिससे अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं।
जुआ और मौत का संदिग्ध कनेक्शन
गढ़ क्षेत्र में हाल ही में हुई एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत ने इलाके में सनसनी फैला दी है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि इस मौत के पीछे जुआ ही मुख्य कारण रहा है। हालांकि, पुलिस इसे अंधेरे के कारण कुएं में गिरना बता रही है, लेकिन निष्पक्ष जांच की मांग अब जोर पकड़ने लगी है।
रिमारी बरैयान: अपराध नहीं, यहाँ 'प्रथा' बन चुका है जुआ
मऊगंज जिले के ग्राम रिमारी बरैयान की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। यहाँ जुए का अड्डा किसी छिपकर चलने वाले अपराध की तरह नहीं, बल्कि एक 'पुरानी प्रथा' की तरह संचालित हो रहा है। गाँव के भीतर चलने वाले इस स्थायी अड्डे को रोकने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है।
आईजी के निर्देश बेअसर, बीट प्रभारियों पर मेहरबानी
रीवा आईजी गौरव राजपूत सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिस भी बीट में अवैध या प्रतिबंधित व्यवसाय पाया जाएगा, वहाँ के बीट प्रभारी पर सख्त कार्यवाही होगी। किंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है:
लौर: यहाँ तीन स्थानों पर स्थायी जुए के फड़ संचालित हैं।
गढ़: पाँच अलग-अलग जगहों पर अवैध गतिविधियां जारी हैं।
रिमारी बरैयान: यहाँ जुआ एक सामाजिक बुराई की जगह 'परंपरा' का रूप ले चुका है।
हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद आज दिनांक तक रीवा या मऊगंज जिले के किसी भी बीट प्रभारी पर कोई ठोस दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई है। क्या उच्च अधिकारियों के सख्त आदेश केवल कागजों तक ही सीमित हैं?
