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| मोबाइल बना सट्टे का महाहथियार: रीवा संभाग में करोड़ों का काला खेल Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - विंध्य क्षेत्र के रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में सट्टा कारोबार अब महज एक बुराई नहीं, बल्कि एक संगठित 'अंडरग्राउंड इंडस्ट्री' का रूप ले चुका है। शहर के रिहायशी इलाकों से लेकर सुदूर गांवों की छोटी दुकानों तक करोड़ों रुपये का यह अवैध खेल खुलेआम संचालित हो रहा है। आलम यह है कि रातों-रात अमीर बनने की चाह में मध्यम और निम्न वर्ग के लोग अपनी जीवन भर की पूंजी गंवाकर दिवालिया हो रहे हैं।
तकनीक के जरिए फैला मकड़जाल कभी कागजी पर्चियों पर सिमटा यह कारोबार अब अत्याधुनिक हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, जिले में 2000 से अधिक अवैध काउंटर सक्रिय हैं। अब दांव लगाने के लिए किसी अड्डे पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती; व्हाट्सएप और विशेष मोबाइल एप्स के जरिए डिजिटल लेन-देन हो रहा है। हाई-टेक होते इस कारोबार को ट्रैक करना पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो रहा है, हालांकि तकनीक के इस युग में पुलिस की 'अनभिज्ञता' पर भी सवाल उठ रहे हैं।
समय का चक्र और मुनाफे का मोहपाश सट्टे के इस खेल को एक सुनियोजित टाइम-टेबल के अनुसार चलाया जाता है, ताकि दिनभर मजदूर और युवा इसमें उलझे रहें:
सत्र: सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक अलग-अलग चरणों (ओपन और क्लोज) में दांव लगाए जाते हैं।
लालच: ₹10 लगाने पर ₹900 (एक का नौ गुना) का भारी मुनाफा दिखाया जाता है। यही वह 'जहर' है जो दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगार युवाओं को अपनी ओर खींचता है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहराता संदेह स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में यह चर्चा आम है कि बिना 'निचले स्तर' की मिलीभगत और "सेवा शुल्क" के निर्धारण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क नहीं चल सकता। लोगों का आरोप है कि अवैध ठिकानों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस का मौन रहना दाल में कुछ काला होने का संकेत देता है। जब तक थाना स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इन आकाओं के हौसले बुलंद रहेंगे।
सामाजिक पतन और बर्बादी सट्टे की इस लत ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने के बाद लोग कर्ज के जाल में फंस रहे हैं, जिससे चोरी, लूट और आत्महत्या जैसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है। युवा पीढ़ी, जिसे देश का भविष्य होना चाहिए, वह नंबरों के इस गणित में अपना करियर और जीवन दोनों बर्बाद कर रही है।
जनता की पुकार: सख्त कार्रवाई की दरकार अब रीवा संभाग के आईजी और नवगठित मऊगंज जिले के एसपी से जनता को उम्मीद है कि वे इस संगठित गिरोह के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई करेंगे। तकनीक का सहारा लेकर इन ठिकानों को ध्वस्त करना और बड़े मगरमच्छों को सलाखों के पीछे भेजना अब प्रशासन की साख का सवाल बन गया है।
