| संस्कृति और परंपराओं के सम्मान की मांग: लेंसकार्ट के कथित नियमों के विरोध में उतरा संस्कृति बचाओ मंच Aajtak24 News |
भोपाल - राजधानी भोपाल सहित प्रदेश भर में लेंसकार्ट कंपनी के कथित आंतरिक नियमों को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। जानकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिए सिंदूर लगाने और हाथों में कलावा (मौली) बांधने पर प्रतिबंध लगाने की बात सामने आई है, जिसका हिंदू संगठनों द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है। संस्कृति बचाओ मंच का कड़ा रुख संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस मामले पर गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंदूर और कलावा हिंदू धर्म की आस्था और पहचान के प्रतीक हैं। श्री तिवारी ने कहा कि किसी भी व्यावसायिक संस्थान को कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कंपनी अपनी नीतियों में सुधार नहीं करती और सनातन परंपराओं का सम्मान नहीं सुनिश्चित करती, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
आस्था और कार्यस्थल में समन्वय की आवश्यकता हिंदू उत्सव समिति और अन्य सामाजिक संगठनों का मानना है कि कार्यस्थल पर अनुशासन जरूरी है, लेकिन वह किसी की धार्मिक स्वतंत्रता की बलि देकर नहीं होना चाहिए। चंद्रशेखर तिवारी ने जोर देकर कहा कि "संस्कृति बचाओ मंच" मध्य प्रदेश की गौरवशाली परंपराओं की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है और ऐसे किसी भी नियम को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो धर्म को भ्रष्ट करने का प्रयास करे।
फिलहाल, इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक संस्कृति की रक्षा के लिए स्वर मुखर हो रहे हैं। संगठनों की मांग है कि कंपनी सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करे और धार्मिक प्रतीकों पर लगी कथित पाबंदी को तुरंत हटाए।