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| अन्नदाता के साथ विश्वासघात; रीवा-मऊगंज में ट्रैक्टर लोन के नाम पर बड़ा सिंडिकेट सक्रिय Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए संचालित सरकारी योजनाएं अब भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों के लिए 'सफेद हाथी' साबित हो रही हैं। रीवा जिले की मनगवां तहसील अंतर्गत ग्राम गुजियारी से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग प्रणाली और ट्रैक्टर एजेंसियों के बीच चल रहे काले गठजोड़ को उजागर कर दिया है। यहाँ एक साधारण किसान प्रशांत सिंह को जालसाजों के एक संगठित गिरोह ने कर्ज के ऐसे जाल में फंसाया है, जो आधुनिक दौर की 'डिजिटल डकैती' से कम नहीं है।
धोखे की बुनियाद: हस्ताक्षर लिए कहीं, लोन दिखाया कहीं
पीड़ित किसान प्रशांत सिंह (पिता केशव सिंह) की दास्तां किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत है। किसान ने 19 फरवरी 2026 को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) मऊगंज में कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर लोन का आवेदन किया था। किसान का आरोप है कि बैंक मैनेजर अनिल शर्मा और एजेंसी के एजेंटों ने कागजी औपचारिकता के बहाने उससे कई कोरे और महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए। किसान को अंधेरे में रखते हुए रिकॉर्ड में 26.45 लाख रुपये का भारी-भरकम लोन दर्ज कर दिया गया, जबकि किसान को केवल 19.83 लाख रुपये की ही जानकारी दी गई। यानी करीब 7 लाख रुपये का सीधा गबन शुरुआत में ही कर दिया गया।
लोन 'क्लोज' करने का रहस्यमयी खेल
इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब किसान ने अपना बैंक स्टेटमेंट देखा। महज दो महीने के भीतर, किसान के खाते में दर्ज लाखों का लोन 'पूर्ण भुगतान' (Paid) दिखाकर बंद कर दिया गया। सवाल यह उठता है कि जिस किसान के पास ट्रैक्टर की किस्त भरने के पैसे नहीं थे, उसने अचानक 20 लाख रुपये कहाँ से जमा कर दिए? क्षेत्रीय गलियारों में यह चर्चा आम है कि अपनी गर्दन फंसती देख बैंक मैनेजर और एजेंसी संचालक ने मिलीभगत कर कागजों पर लीपापोती की और ऑडिट से बचने के लिए खुद ही फर्जी तरीके से लोन बंद कर दिया। यह सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन का मामला है।
न्याय की गुहार पर मिली दबंगई
जब किसान को इस धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तो उसने 10 अप्रैल को एसपी मऊगंज और कलेक्टर से लिखित शिकायत की। लेकिन न्याय मिलना तो दूर, शिकायत के ठीक सात दिन बाद 17 अप्रैल को एजेंसी के गुंडे किसान के घर पहुंचे और जबरन उसका ट्रैक्टर और थ्रेशर मशीन उठा ले गए। यह कार्रवाई न केवल अवैध है बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे 'जंगलराज' का प्रमाण भी है। शिकायत के बाद किसान को सुरक्षा और न्याय देने के बजाय उसे आर्थिक रूप से पंगु बना दिया गया।
व्यापक जांच और भौतिक सत्यापन की मांग
प्रशांत सिंह के साथ हुई यह घटना महज़ एक बानगी है। आशंका जताई जा रही है कि रीवा और मऊगंज जिले में ऐसे सैकड़ों प्रकरण हो सकते हैं जहाँ अशिक्षित या भोले-भाले किसानों के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है।
क्षेत्रवासियों और पीड़ित की प्रशासन से प्रमुख मांगें:
जिला कलेक्टर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करें।
SBI मऊगंज के संबंधित मैनेजर और एजेंसी संचालक के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज हो।
जिले में पिछले दो वर्षों में हुए सभी ट्रैक्टर लोन का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाए ताकि अन्य पीड़ित किसानों को राहत मिल सके।
अब देखना यह होगा कि रीवा का जिला प्रशासन इस 'सफेदपोश संगठित अपराध' के खिलाफ क्या रुख अपनाता है। क्या पीड़ित किसान को उसका ट्रैक्टर और सम्मान वापस मिलेगा, या फिर फाइलें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगी?
