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| सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सामने समाजसेवियों का सांकेतिक धरना, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की उठी मांग Aajtak24 News |
रीवा - जिला मुख्यालय रीवा में स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सामने बुधवार को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर समाजसेवियों, युवाओं और बुद्धिजीवियों ने सांकेतिक धरना दिया। यह धरना वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी अमृतलाल मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी बीके माला सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल हुए। धरने में शामिल लोगों ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष की समस्या नहीं, बल्कि पूरे रीवा संभाग की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सार्वजनिक मुद्दा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है और कई बार उन्हें निजी अस्पतालों की ओर जाने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे गरीब और असहाय मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। समाजसेवियों ने यह भी कहा कि रीवा जिला प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह जिला और विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में यदि उनके ही गृह जिले और संभाग की स्वास्थ्य व्यवस्था सवालों के घेरे में है, तो प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। इस विषय को लेकर धरना स्थल से प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
आरटीआई कार्यकर्ता बीके माला ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सामने यह सांकेतिक धरना शांति पूर्ण तरीके से आयोजित किया गया है, ताकि प्रशासन को स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में बड़ी संख्या में निजी नर्सिंग होम और जांच केंद्र तेजी से खुल रहे हैं, जहां दवाइयों और जांच के नाम पर मरीजों से मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। धरने में वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई शासकीय चिकित्सक निजी नर्सिंग होम में सेवाएं देते नजर आते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त समय और सुविधा नहीं मिल पाती। वहीं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की अधोसंरचना को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अस्पताल में हाल के वर्षों में बने कुछ हिस्सों में निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आई हैं, जिससे व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
प्रदर्शनकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उनका कहना था कि कई गांवों के अस्पतालों में डॉक्टर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे झोलाछाप डॉक्टरों का वर्चस्व बढ़ गया है। रीवा और मऊगंज ही नहीं, बल्कि पूरे रीवा संभाग में मेडिकल स्टोर्स और छोटे-छोटे क्लीनिकों में बिना उचित मान्यता के इलाज किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। इसके साथ ही शहर में तेजी से खुल रहे पैथोलॉजी और जांच केंद्रों पर भी सवाल उठाए गए। समाजसेवियों का कहना था कि इन केंद्रों पर किस प्रकार के विशेषज्ञ कार्य कर रहे हैं और जांच की गुणवत्ता क्या है, इसकी प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है। उन्होंने मांग की कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन संस्थानों की गोपनीय जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
धरना स्थल से समाजसेवियों ने जिला प्रशासन, संभागीय आयुक्त तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की मांग की। उनका कहना था कि सरकार द्वारा जनता के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन यदि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी व्यवस्था ही कमजोर होगी तो आम नागरिकों को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा। धरना आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सांकेतिक आंदोलन है। यदि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो आने वाले समय में व्यापक आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है। उनका कहना था कि रीवा संभाग के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
