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| गर्मी में बोतलबंद पानी और कोल्ड ड्रिंक की बढ़ती बिक्री पर सवाल, धूप में रखे पैक्ड पानी से स्वास्थ्य पर खतरा Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजारों में प्यास बुझाने के लिए बोतलबंद पानी, पाउच में पैक पानी और विभिन्न प्रकार के कोल्ड ड्रिंक की बिक्री तेज हो गई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक लगभग हर दुकान में प्लास्टिक की बोतलों और पाउच में बंद पानी खुलेआम बिक रहा है। लेकिन इन उत्पादों की गुणवत्ता और भंडारण की स्थिति को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बाजार में अक्सर देखा जा रहा है कि दुकानदार बोतलबंद पानी और कोल्ड ड्रिंक की पेटियों को दुकान के बाहर या छत पर सीधे धूप में रख देते हैं। कई बार ये उत्पाद घंटों तक तेज धूप में पड़े रहते हैं। बाद में इन्हें फ्रिज या अन्य उपकरणों में ठंडा कर ग्राहकों को बेच दिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक की बोतलों या पाउच में लंबे समय तक धूप के संपर्क में रखा गया पानी रासायनिक बदलाव के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसके बावजूद इस गंभीर पहलू की ओर न तो दुकानदार ध्यान दे रहे हैं और न ही संबंधित विभागों की ओर से नियमित निगरानी की जा रही है।
बाजार में केवल नामी ब्रांड ही नहीं बल्कि अनेक छोटी-बड़ी कंपनियों के पैक्ड पानी और कोल्ड ड्रिंक भी धड़ल्ले से बिक रहे हैं। इनमें से कई कंपनियों के उत्पादों की गुणवत्ता, लाइसेंस और मानकों को लेकर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। शासन द्वारा खाद्य सुरक्षा और पेयजल से जुड़े स्पष्ट मापदंड निर्धारित किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन कितना हो रहा है, इसकी जांच शायद ही कभी होती है। कभी-कभार होने वाली छापामार कार्रवाई में ही कई बार अवैध या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों का खुलासा हो पाता है। बदलती जीवनशैली के कारण अब लोग सालभर पैक्ड पानी का उपयोग करने लगे हैं। पहले दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर मिट्टी के घड़ों या मटकों में पानी रखा जाता था, जिससे लोग मुफ्त में पानी पी लेते थे। लेकिन अब अधिकतर दुकानों में ग्राहकों को बोतलबंद पानी ही उपलब्ध कराया जाता है। दुकानदारों के लिए यह अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गया है, जिसके चलते वे पारंपरिक व्यवस्था को लगभग समाप्त कर चुके हैं।
इसी प्रकार बाजार में विभिन्न कंपनियों के नाम से ऑरेंज, लेमन, कोला और अन्य फ्लेवर वाले कोल्ड ड्रिंक भी बड़े पैमाने पर बेचे जा रहे हैं। विज्ञापनों और प्रचार के माध्यम से इन्हें ताजगी देने वाला और पौष्टिक पेय पदार्थ बताया जाता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनका चलन तेजी से बढ़ा है। लेकिन कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक मीठे और कृत्रिम तत्वों से बने इन पेय पदार्थों का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। चिंता की बात यह है कि गांवों में रहने वाले अशिक्षित ही नहीं बल्कि शिक्षित लोग भी बिना गुणवत्ता की जांच किए इन उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। कई बार सस्ते दाम के लालच में लोग ऐसी कंपनियों के उत्पाद खरीद लेते हैं जिनकी विश्वसनीयता स्पष्ट नहीं होती। इससे पेट संबंधी रोग, संक्रमण और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सामाजिक रूप से जागरूक लोगों और उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है। अधिकृत एजेंटों और वितरकों की जांच की जानी चाहिए तथा दुकानों का गोपनीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उन्हें मिलने वाले पानी और अन्य तरल पदार्थ अधिकृत कंपनियों से पक्के बिल के साथ ही प्राप्त हुए हैं या नहीं। यदि बिना बिल या संदिग्ध स्रोत से उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गर्मी का मौसम अभी शुरू ही हुआ है और आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने के साथ पैक्ड पानी व कोल्ड ड्रिंक की मांग भी कई गुना बढ़ जाएगी। ऐसे में रीवा और मऊगंज जिले के प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वे संयुक्त रूप से बाजार में बिक रहे पैक्ड पानी और कोल्ड ड्रिंक की गुणवत्ता की नियमित जांच करें। साथ ही धूप में खुलेआम रखकर बेचे जा रहे ऐसे उत्पादों पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि गर्मी के इस मौसम में लोगों को संभावित बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी खतरों से बचाया जा सके।
