आयुष्मान योजना की आड़ में खेल? रीवा और मऊगंज के निजी नर्सिंग होमों में 'अनचाहे' ऑपरेशनों की बाढ़ Aajtak24 News

आयुष्मान योजना की आड़ में खेल? रीवा और मऊगंज के निजी नर्सिंग होमों में 'अनचाहे' ऑपरेशनों की बाढ़ Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज - केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'आयुष्मान भारत योजना' जहाँ गरीबों के लिए वरदान साबित होनी चाहिए थी, वहीं रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में यह योजना कुछ निजी नर्सिंग होमों के लिए 'कमाई का जरिया' बनती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयुष्मान कार्ड के नाम पर अनावश्यक जांच, लंबी भर्ती और बिना जरूरत के ऑपरेशन कर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।

प्रसव के मामलों में चौंकाने वाले आंकड़े

इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर शिकायतें प्रसव (Maternity) के मामलों में सामने आई हैं। आंकड़ों का विरोधाभास संदेह पैदा करता है। जिले के सरकारी अस्पतालों में जहाँ 70 से 80 प्रतिशत प्रसव सामान्य (Normal) होते हैं, वहीं इसके उलट निजी नर्सिंग होमों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रसव ऑपरेशन (C-Section) के माध्यम से हो रहे हैं। आरोप है कि आयुष्मान योजना से मिलने वाली अधिक राशि के लालच में मामूली केसों को भी 'कॉम्प्लिकेटेड' बताकर गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन कर दिया जाता है। इससे न केवल सरकारी कोष पर भार पड़ता है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

शासकीय डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल

क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कई विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी मूल ड्यूटी के बजाय निजी नर्सिंग होमों में सेवाएं दे रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब मरीजों को बहला-फुसलाकर या सुविधाओं का अभाव बताकर निजी केंद्रों में 'शिफ्ट' कर दिया जाता है। यदि इन निजी केंद्रों के पिछले एक साल के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो भर्ती और उपचार की प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।

अनावश्यक भर्ती और पारदर्शी बिलिंग का अभाव

मरीजों और उनके परिजनों की शिकायत है कि सामान्य बुखार या छोटी बीमारियों में भी उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा जाता है। मरीज को अक्सर यह पता ही नहीं होता कि उसके आयुष्मान कार्ड से कितनी राशि का क्लेम किया गया है। डायग्नोसिस और पैथोलॉजी जांच के नाम पर भी भारी बिलिंग दिखाई जा रही है। जानकारों का कहना है कि कुछ पैथोलॉजी लैब्स और निजी डॉक्टरों के बीच कमीशन का एक गहरा नेटवर्क काम कर रहा है।

देशव्यापी चिंता और स्थानीय मांग

यह समस्या केवल स्थानीय नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में आयकर विभाग की जांच में अनावश्यक सर्जरी और जांच के मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हृदय सर्जरी, घुटने के प्रत्यारोपण और गर्भाशय हटाने जैसे मामलों में भी अनावश्यक ऑपरेशनों की संख्या बढ़ी है। रीवा और मऊगंज के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत सभी अस्पतालों का नियमित ऑडिट और क्लीनिकल वेरिफिकेशन किया जाए।

प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे निजी नर्सिंग होमों की सर्जिकल स्ट्राइक रेट (सर्जरी की दर) का विश्लेषण करें। यदि किसी अस्पताल में ऑपरेशन का प्रतिशत असामान्य रूप से अधिक है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजना की शुचिता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है ताकि इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे।

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