रीवा में ऊर्जा हाहाकार: रसोई में गैस नहीं, सड़कों पर डीजल की किल्लत; पैनिक में आई जनता Aajtak24 News

रीवा में ऊर्जा हाहाकार: रसोई में गैस नहीं, सड़कों पर डीजल की किल्लत; पैनिक में आई जनता Aajtak24 News

रीवा -  महानगरों के बाद अब विंध्य के हृदय स्थल रीवा में भी ऊर्जा संकट ने अपने पैर पसार लिए हैं। जिले में घरेलू गैस (LPG) और डीजल की भारी किल्लत के चलते आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि गैस एजेंसियों के बाहर अलसुबह से ही हजारों की संख्या में उपभोक्ता कतारबद्ध नजर आ रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

आधे से भी कम रह गई गैस की आपूर्ति रीवा की प्रमुख गैस एजेंसियों, जैसे 'पॉपुलर गैस एजेंसी' सहित अन्य वितरकों के पास गैस की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान्य तौर पर जहाँ शहर में प्रतिदिन 700 से अधिक सिलेंडरों की मांग और पूर्ति होती थी, वह अब सिमटकर महज 250 से 300 के बीच रह गई है। इस वैश्विक संकट का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी युद्ध और तनाव को बताया जा रहा है, जिससे कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है।

कालाबाजारी का खेल और वायरल वीडियो का सच एक ओर आम जनता एक-एक सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में लगी है, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी करने वाले गिरोह सक्रिय हो गए हैं। निर्धारित दरों के बजाय ब्लैक मार्केट में गैस सिलेंडर ₹1500 से ₹1600 तक में बेचे जा रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने प्रशासन और गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक गैस एजेंसी का ऑटो घरेलू सिलेंडरों की खेप एक निजी रेस्टोरेंट में उतारता दिख रहा है। घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग और इस अवैध 'सेटिंग' ने उपभोक्ताओं के आक्रोश को चरम पर पहुंचा दिया है।

डीजल के अभाव में थमे वाहनों के पहिए ऊर्जा संकट केवल रसोई तक सीमित नहीं है। रीवा के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटकने लगे हैं। विशेष रूप से डीजल की भारी किल्लत देखी जा रही है। इसका सीधा असर परिवहन सेवाओं और खेती-किसानी पर पड़ रहा है। डीजल न मिलने से मालवाहक गाड़ियां खड़ी हो गई हैं, जिससे आने वाले दिनों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासनिक दावे बनाम जमीनी हकीकत जिला प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है और स्टॉक की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों से निरंतर संपर्क किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से पैनिक बुकिंग न करने की अपील की है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के उलट है। एजेंसियों पर बढ़ती भीड़ और पंपों पर सन्नाटा यह बताने के लिए काफी है कि संकट गहरा है।

उपभोक्ताओं की मांग स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन कालाबाजारी करने वालों पर रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही, यह मांग भी उठ रही है कि जब तक आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक प्रशासन राशन कार्ड के आधार पर सिलेंडरों का वितरण अपनी निगरानी में कराए ताकि जरूरतमंदों को राहत मिल सके।



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