रीवा में 'बुलडोजर' का प्रहार: दुआरी तालाब के डूब क्षेत्र में बने 23 पक्के निर्माण ध्वस्त, छावनी बना इलाका Aajtak24 News

रीवा में 'बुलडोजर' का प्रहार: दुआरी तालाब के डूब क्षेत्र में बने 23 पक्के निर्माण ध्वस्त, छावनी बना इलाका Aajtak24 News

रीवा - मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रशासन ने जल स्रोतों के संरक्षण और तालाबों के अस्तित्व को बचाने की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार की सुबह चोरहटा थाना क्षेत्र स्थित दुआरी तालाब की जमीन पर वर्षों से काबिज अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन का 'बुलडोजर' जमकर गरजा। भारी सुरक्षा घेरे और तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रशासन ने तालाब के डूब क्षेत्र में बने 23 अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

अलसुबह शुरू हुआ एक्शन, छावनी में तब्दील हुआ दुआरी गुरुवार सुबह करीब 8 बजे जब लोग अपने दिन की शुरुआत कर रहे थे, तभी राजस्व विभाग, नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम दुआरी तालाब पहुँच गई। देखते ही देखते पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। मौके पर तीन वज्र वाहन और आंसू गैस (Tear Gas) की टीमें तैनात की गई थीं, ताकि किसी भी संभावित हिंसक विरोध को तत्काल नियंत्रित किया जा सके।

23 पक्के अवैध निर्माणों पर चला पीला पंजा राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में चिन्हित किए गए 23 अवैध मकानों और दुकानों को ढहाने के लिए कई बुलडोजर एक साथ लगाए गए। प्रशासन की इस अचानक और बड़ी कार्रवाई से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कार्रवाई के दौरान कुछ कब्जाधारियों ने विरोध करने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लेकर मौके से दूर कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि तालाब की यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में 'डूब क्षेत्र' दर्ज है, जहाँ किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है।

नोटिस की अनदेखी पड़ी भारी राजस्व अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। कब्जाधारियों को पिछले कई महीनों से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे। उन्हें बार-बार चेतावनी दी गई और स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिए पर्याप्त मोहलत भी प्रदान की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि जब मोहलत खत्म होने के बाद भी लोगों ने तालाब की जमीन खाली नहीं की, तब प्रशासन को बलपूर्वक यह कदम उठाना पड़ा।

न्यायालय के निर्देश और प्रशासनिक तर्क प्रशासनिक अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि यह पूरी कार्रवाई माननीय न्यायालय के निर्देशों के पालन में की जा रही है। पर्यावरण संतुलन और भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए जल स्रोतों का संरक्षण अनिवार्य है। तालाबों के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण जल भराव की क्षमता कम हो जाती है, जिससे न केवल जल स्तर गिरता है बल्कि आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ जाता है।

पीड़ितों का विलाप: "सिर से छिन गई छत" वहीं दूसरी ओर, मलबे के ढेर में अपनी गृहस्थी समेटते प्रभावित परिवारों का दर्द फूट पड़ा। बेघर हुए परिवारों का आरोप है कि वे यहाँ पिछले 30-40 वर्षों से रह रहे थे। उनके पास बिजली कनेक्शन और अन्य दस्तावेज भी थे। उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए भी पर्याप्त समय नहीं दिया और कड़ाके की इस धूप में उनके सिर से छत छीन ली गई।

बड़े भू-भाग को कराया गया मुक्त शाम तक चली इस लंबी जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने तालाब की कई एकड़ बेशकीमती जमीन को अतिक्रमण मुक्त करा लिया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जिले की अन्य जल संरचनाओं पर भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल मौके पर एहतियातन पुलिस बल तैनात है ताकि दोबारा अतिक्रमण की स्थिति न बने।



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