रीवा पुलिस ने लौटाए ₹20 लाख के 111 मोबाइल; सफलता के बीच उठ रहे कई तीखे सवाल Aajtak24 News

 रीवा पुलिस ने लौटाए ₹20 लाख के 111 मोबाइल; सफलता के बीच उठ रहे कई तीखे सवाल Aajtak24 News

रीवा - रीवा पुलिस ने तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए 'ऑपरेशन रिंगटोन' के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक (SP) शैलेंद्र सिंह ने अमहिया थाना क्षेत्र से गुम हुए 111 मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे। इन बरामद मोबाइल फोनों की कुल बाजार कीमत लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है।

चेहरों पर लौटी मुस्कान

कार्यक्रम के दौरान जब लोगों को उनके महीनों पहले खोए हुए महंगे स्मार्टफोन वापस मिले, तो उनके चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। मोबाइल मालिकों ने रीवा पुलिस की इस कार्यप्रणाली की सराहना की और आभार जताया। पुलिस अधीक्षक ने इस बड़ी उपलब्धि के लिए अमहिया थाना प्रभारी शिवा अग्रवाल और उनकी पूरी टीम की पीठ थपथपाई। एसपी ने जनता से अपील की है कि मोबाइल गुम होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल संबंधित थाने या पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि तकनीकी सेल (Cyber Cell) की मदद से उन्हें समय पर ट्रेस किया जा सके।

सफलता के बीच 'चोरी' पर उठते सवाल

जहाँ एक ओर पुलिस की इस कार्रवाई को 'काबिले तारीफ' माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर और ग्रामीण अंचलों में एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। आम जनमानस के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या मोबाइल केवल 'गुम' होते हैं या फिर बड़े पैमाने पर 'चोरी' भी किए जा रहे हैं?

जनता के मन में उठ रहे कुछ अनसुलझे सवाल:

  • चोरी का जाल: बाजारों, यात्रा के दौरान और सार्वजनिक उत्सवों में मोबाइल चोरी की घटनाएं आम हैं। क्या इन बरामद मोबाइलों में से कुछ चोरी के भी थे?

  • सफेदपोश अपराधी: चोरी करने वाला कौन है और इसे खरीदने वाला कौन? सबसे बड़ा सवाल उन दुकानदारों पर है जो बिना किसी पहचान पत्र या आधार कार्ड के चोरी के मोबाइल के 'लॉक' तोड़ देते हैं।

  • रैकेट का खुलासा कब?: शहर से लेकर मऊगंज तक मोबाइल चोरी की शिकायतों का अंबार है। जनता अब यह जानना चाहती है कि पुलिस केवल गुम हुए मोबाइल ही लौटाएगी या इन संगठित गिरोहों और 'लॉक' तोड़ने वाले तकनीकी विशेषज्ञों तक भी पहुंचेगी?

रीवा पुलिस की आगामी चुनौती

निश्चित रूप से 111 मोबाइल वापस दिलाना पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है, लेकिन असली चुनौती उस नेटवर्क को ध्वस्त करना है जो चोरी के मोबाइलों की खरीद-बिक्री और उनके आईएमईआई (IMEI) के साथ छेड़छाड़ करता है। लोगों का मानना है कि जब तक 'लॉक' तोड़ने वाले और चोरी का माल खरीदने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मोबाइल गायब होने का यह सिलसिला थमेगा नहीं।



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