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| रीवा: गढ़ थाने में 'खाकी' और 'लाला जी' का गठजोड़! नशे के कारोबार और शाम की महफिलों ने पुलिस की साख पर उठाए सवाल Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक द्वारा 'नशा मुक्त प्रदेश' बनाने के कड़े निर्देशों को रीवा जिले का एक थाना खुलेआम ठेंगा दिखा रहा है। रीवा जिले के गढ़ थाना क्षेत्र से जो तस्वीरें और खबरें छनकर आ रही हैं, वे न केवल हैरान करने वाली हैं, बल्कि यह भी संकेत दे रही हैं कि नशे के सौदागरों की जड़ें पुलिस के भीतर कितनी गहरी हो चुकी हैं। क्षेत्र में इन दिनों 'लाला जी' नाम का एक कथित नशा कारोबारी और स्थानीय बीट प्रभारी की दोस्ती की कहानियाँ हर जुबान पर हैं।
वायरल वीडियो: वर्दी की गरिमा को तार-तार करती 'महफिल'
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के अनुसार, गढ़ थाने के पास ही शाम ढलते ही एक विशेष दरबार सजता है। आरोप है कि इस 'महफिल' का सूत्रधार लाला जी है, जो पुलिस के कुछ खास नुमाइंदों की खातिरदारी में महंगी शराब (सुरा) और मांसाहारी व्यंजनों का इंतजाम करता है। इस महफिल के कई वीडियो और फोटो चर्चा में हैं, जिनमें खाकी की मौजूदगी स्पष्ट देखी जा सकती है। जब रक्षक ही भक्षकों के साथ जाम छलकाएंगे, तो आम जनता की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद बेमानी हो जाती है।
नशीली गोलियों का सिंडिकेट और 'लाला' का रसूख
गढ़ क्षेत्र पिछले काफी समय से नशीली गोलियों (प्रतिबंधित ड्रग्स) और कोडीन युक्त सिरप की अवैध बिक्री का केंद्र बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि लाला जी इस सिंडिकेट का अहम हिस्सा है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि जब भी नशे के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई होने वाली होती है, तो 'लाला' को पहले ही भनक लग जाती है। यही कारण है कि पुलिस की तमाम दबिशों के बावजूद मुख्य सरगना कभी हाथ नहीं आता।
'बलि के बकरे' और फर्जी कार्रवाई का खेल
जनता के बीच इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस अपनी पीठ थपथपाने के लिए कुछ निर्दोषों या छोटे प्यादों को आरोपी बनाकर जेल भेज देती है, जबकि असली माफिया खुलेआम घूम रहे हैं। आरोप है कि बीट प्रभारी और लाला जी की जुगलबंदी के चलते पुलिस रिकॉर्ड में केवल उन्हीं लोगों के नाम आते हैं जो 'सेटिंग' करने में नाकाम रहते हैं। यह खेल पुलिस के मुखबिर तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर चुका है।
वरिष्ठ अधिकारियों की साख दांव पर
रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) लगातार जिले में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चला रहे हैं। लेकिन गढ़ थाने के भीतर चल रहे इस कथित 'नेक्सस' ने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि गढ़ पुलिस की कॉल डिटेल्स (CDR) और वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई बड़े चेहरों से नकाब उतर सकता है। पुलिस प्रशासन की छवि पर इस घटना ने जो दाग लगाया है, उसे मिटाना अब एक बड़ी चुनौती है।
जनमानस में बढ़ता अविश्वास
किसी भी क्षेत्र की कानून व्यवस्था तभी मजबूत रहती है जब जनता को पुलिस पर भरोसा हो। लेकिन गढ़ थाना क्षेत्र में स्थिति इसके विपरीत है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह भावना घर कर गई है कि नशे का कारोबार पुलिस के बिना नहीं चल सकता। शाम की महफिलों में होने वाली ये गुप्त चर्चाएं दरअसल जनता के साथ विश्वासघात हैं।
प्रशासन से तीखे सवाल:
क्या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गढ़ थाने में चल रहे इस 'महफिल संस्कृति' की जांच करेंगे?
वायरल वीडियो और लाला जी के संबंधों पर बीट प्रभारी से पूछताछ क्यों नहीं की गई?
नशीली गोलियों के असली सौदागरों को पकड़ने में पुलिस नाकाम क्यों है?
यह मामला फिलहाल आरोपों के घेरे में है, लेकिन धुआं वहीं उठता है जहाँ आग लगी हो। गढ़ क्षेत्र की जनता अब न्याय और नशे से मुक्ति चाहती है। यह आवश्यक है कि रीवा के उच्च पुलिस अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करें और दोषियों के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई करें। अगर इस गठजोड़ को नहीं तोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ी नशे के अंधेरे में खो जाएगी।
