अवैध खनन का खूनी खेल—पहाड़ों को नेस्तनाबूत कर रहे माफिया, सच दिखाने पर मीडिया टीम से अभद्रता Aajtak24 News

अवैध खनन का खूनी खेल—पहाड़ों को नेस्तनाबूत कर रहे माफिया, सच दिखाने पर मीडिया टीम से अभद्रता Aajtak24 News

मऊगंज - मध्यप्रदेश के नवनिर्मित जिले मऊगंज में अवैध उत्खनन का काला साम्राज्य इस कदर जड़ें जमा चुका है कि अब यहां न कानून का खौफ बचा है और न ही प्रशासन की साख। हनुमना तहसील के लोढ़ी सहित दर्जनों गांवों में माफियाओं ने कुदरत की अनमोल देन—पहाड़ों और जंगलों को—अपना चारागाह बना लिया है। यहाँ के पहाड़ों को जिस बेरहमी से छलनी किया जा रहा है, वह न केवल पर्यावरण के लिए विनाशकारी है, बल्कि सरकार के खजाने को भी करोड़ों का चूना लगा रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट: जहाँ पहाड़ों की जगह दिखती हैं सिर्फ खाइयाँ

मीडिया की टीम जब हनुमना के लोढ़ी और आसपास के इलाकों में पड़ताल करने पहुँची, तो वहां के दृश्य रोंगटे खड़े करने वाले थे। जो पहाड़ कभी हरियाली से लदे थे, आज वहां सिवाए गहरे गड्ढों, मलबे और टूटी हुई चट्टानों के कुछ नहीं बचा। भारी मशीनों (JCB और पोकलेन) के जरिए पहाड़ों को काटा जा रहा है। यहां से पत्थर की चीप, पटिया और ढोका निकाला जाता है और एक संगठित नेटवर्क के जरिए इसे ट्रकों में लादकर उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं तक भेजा जा रहा है। यह पूरा कारोबार एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट के इशारे पर फल-फूल रहा है।

मीडिया पर हमला: सच दबाने की कोशिश

पड़ताल के दौरान जब मीडिया की टीम ने अवैध खनन की तस्वीरें कैमरे में कैद करनी शुरू कीं, तो वहां हड़कंप मच गया। पहले तो मशीनें आनन-फानन में बंद कर दी गईं और लोग वहां से भागने लगे। लेकिन कुछ ही मिनटों में माफियाओं का एक गिरोह वहां सक्रिय हो गया और मीडियाकर्मियों की घेराबंदी कर ली गई। सच को कैमरे में कैद होता देख माफियाओं ने पत्रकारों के साथ झूमझटकी की और गाली-गलौज करते हुए उनके उपकरणों को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि अपनी जान बचाने के लिए मीडिया टीम को वहां से निकलना पड़ा। यह हमला इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि खनन माफिया अब कानून को अपनी जेब में समझते हैं।

प्रशासन की चुप्पी और भ्रष्टाचार की बू

हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों और कड़े प्रतिबंधों के बावजूद यह काम खुलेआम हो रहा है। वन विभाग और खनिज विभाग के अधिकारियों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या यह संभव है कि सैकड़ों ट्रकों का आवागमन और भारी मशीनों का शोर प्रशासन के कान तक नहीं पहुँच रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें ही धमकाया जाता है, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

अधिवक्ता बीके माला की शिकायत: राजस्व की बड़ी लूट

वरिष्ठ अधिवक्ता बीके माला ने इस मुद्दे को लेकर मऊगंज कलेक्टर और रीवा संभाग आयुक्त तक अपनी शिकायत पहुँचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि हनुमना क्षेत्र में बिना किसी वैध अनुमति के सैकड़ों खदानें संचालित हैं। बीके माला का कहना है कि सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है और पर्यावरण की ऐसी तबाही हो रही है जिसकी भरपाई आने वाली पीढ़ियाँ नहीं कर पाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जांच कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन का रूप ले सकता है।

सांसद जनार्दन मिश्रा का कड़ा रुख

अवैध खनन और गुंडागर्दी की बढ़ती खबरों के बीच क्षेत्रीय सांसद जनार्दन मिश्रा ने माफियाओं को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि—

"क्षेत्र में किसी भी तरह की गुंडागर्दी और प्राकृतिक संसाधनों की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग कानून को हाथ में ले रहे हैं, उन्हें उनकी सही जगह यानी जेल भेजा जाएगा। प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अवैध खनन को तत्काल रोककर माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।"

निष्कर्ष: कब जागेगा प्रशासन?

मऊगंज के ये पहाड़ केवल पत्थर के टुकड़े नहीं, बल्कि यहाँ के पारिस्थितिकी तंत्र का आधार हैं। यदि अवैध उत्खनन के इस काले साम्राज्य पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में क्षेत्र को गंभीर पर्यावरणीय आपदा का सामना करना पड़ेगा। सवाल आज भी बरकरार है—क्या मऊगंज का प्रशासन माफियाओं के आगे नतमस्तक रहेगा, या फिर मुख्यमंत्री के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों को धरातल पर सच साबित करेगा?





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