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| खुद को पत्रकार साबित करने यूट्यूबरों द्वारा पत्रकारों को टारगेट करना शर्मनाक Aajtak24 News |
रीवा/गढ़ - विगत 35 वर्षों से पत्रकारिता और समाजसेवा से जुड़े गढ़ निवासी वरिष्ठ पत्रकार संजय पांडेय ने आज की तथाकथित “डिजिटल पत्रकारिता” पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि पत्रकारिता अब मिशन नहीं, बल्कि कई जगहों पर “कमाई का शॉर्टकट” बनती जा रही है। विशेष रूप से YouTube आधारित चैनलों की बढ़ती संख्या ने बिना रजिस्ट्रेशन, पंजीयन, प्रशिक्षण, बिना संपादकीय जिम्मेदारी और बिना तथ्य-जांच के खबरों की बाढ़ ला दी है।संजय पांडेय का कहना है कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि कैमरा और मोबाइल मिलते ही लोग खुद को पत्रकार घोषित कर रहे हैं। सत्यापन, दस्तावेज़ और दोनों पक्षों का मत—ये सब अब कई प्लेटफॉर्म पर औपचारिकता भी नहीं रह गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ तथाकथित यूट्यूबर चंद पैसों के लिए किसी के खिलाफ भी खबर चलाने को तैयार रहते हैं।
संजय पांडेय ने आरोप पर आधारित और विरोधाभास पर दिए गए बयान आधारित खबरों को “सुपारी पत्रकारिता” बताते हुए कहा कि दिहाड़ी मानसिकता ने पत्रकारिता की आत्मा को चोट पहुंचाई है। बिना प्रमाण किसी का नाम उछाल देना, वीडियो के नाम पर चरित्रहनन करना और बाद में समझौते की खबरें—ये प्रवृत्तियां लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या अब पत्रकारिता खबर दिखाने के बजाय दबाव बनाने का माध्यम बनती जा रही है? क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म की आड़ में ब्लैकमेलिंग का नया तंत्र खड़ा हो रहा है?
संजय पांडेय ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते पत्रकारिता के नाम पर चल रहे इस अव्यवस्थित और गैर-जिम्मेदार तंत्र पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो जनता का भरोसा मीडिया से पूरी तरह उठ सकता है—और यह स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा होगी। चेतावनी यह साफ है कि पत्रकारिता अगर मिशन से व्यवसाय बनी तो स्वीकार्य है, लेकिन व्यवसाय से “वसूली तंत्र” ब्लैकमेलिंग का माध्यम बनी, तो यह समाज के लिए सबसे खतरनाक मोड़ साबित होगा।
