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| मनगवां तहसील में प्रशासनिक अराजकता: स्कूल की जमीन पर कब्जा और गायब हो रहीं फाइलें; अधिवक्ता संघ ने खोला मोर्चा Aajtak24 News |
रीवा/मनगवां - रीवा जिले की तहसील मनगवां के अंतर्गत आने वाली उप-तहसील गढ़ इन दिनों भ्रष्टाचार, लापरवाही और अव्यवस्थाओं का अड्डा बन चुकी है। अधिवक्ता संघ मनगवां के सचिव बृजेंद्र सिंह ने तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अधिवक्ता का दावा है कि यहाँ न्याय के बदले केवल 'तारीख' और 'असुविधा' मिल रही है, जिससे आम जनता और पक्षकार त्रस्त हैं।
शिक्षा के मंदिर पर अतिक्रमण, शिकायतों पर तहसीलदार की बेरुखी
अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह ने खुलासा किया कि गढ़ स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल की बेशकीमती भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा कर पक्के निर्माण किए जा रहे हैं। इस संबंध में जब तहसीलदार को साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई, तो तहसीलदार ने कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें कार्यालय से भगा दिया। यह आरोप सीधे तौर पर प्रशासन और अतिक्रमणकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
रिकॉर्ड रूम से फाइलें 'गायब', रजिस्टर में इंद्राज तक नहीं
कार्यालय के भीतर चल रहे सबसे बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए अधिवक्ता ने बताया कि यहाँ से महत्वपूर्ण फाइलें और दस्तावेज रहस्यमयी तरीके से गायब हो रहे हैं। कई गंभीर प्रकरणों का न तो रजिस्टर में इंद्राज (Entry) किया जा रहा है और न ही उन पर सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर हो रहे हैं। गायब हुई फाइलों का अब तक कोई सुराग नहीं मिलना, कार्यालय की सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
10 बजे का कार्यालय, दोपहर में आते हैं 'साहब'
सरकारी नियमों के अनुसार कार्यालय खुलने का समय सुबह 10 बजे है, लेकिन अधिवक्ता का आरोप है कि कर्मचारी और अधिकारी अपनी मर्जी के मालिक हैं। वे दोपहर 12 से 1 बजे के बीच दफ्तर पहुँचते हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले पक्षकार घंटों इंतजार करने के बाद बैरंग लौटने को मजबूर हैं। समय की इस पाबंदी न होने के कारण राजस्व संबंधी कार्य महीनों से लंबित पड़े हैं।
सड़कों पर जाम और प्रशासनिक उदासीनता
तहसील कार्यालय के बाहर की स्थिति भी कम बदतर नहीं है। गढ़-नईगढ़ी रोड पर व्यापारियों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण यातायात पूरी तरह बाधित रहता है। घंटों लगने वाले जाम के बावजूद राजस्व विभाग या स्थानीय पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे आम नागरिक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
नायब तहसीलदार ने साधी चुप्पी
इन गंभीर आरोपों के संबंध में जब नायब तहसीलदार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने न तो कोई जानकारी प्रदान की और न ही फोन उठाना मुनासिब समझा। अधिवक्ता संघ का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को भी सूचित किया है, लेकिन वहां से भी केवल खोखले आश्वासन ही मिल रहे हैं। सरकार की मंशा है कि जनता को उनके निकटतम स्थान पर सुलभ न्याय और लाभ मिल सके, लेकिन गढ़ उप-तहसील में 'सेवा शुल्क' और 'पेशी दर पेशी' ने न्याय की राह में बाधाएं खड़ी कर दी हैं। यदि समय रहते जिला कलेक्टर ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया, तो अधिवक्ता संघ और स्थानीय जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
