इंदौर में बेहतर ट्रैफिक के लिए चौराहों का सुधार जरूरी - सेठ Aajtak24 News

शहर के प्रमुख सिविल इंजीनियर ने की मीडिया से चर्चा

इंदौर - शहर के आगरा–मुंबई मार्ग का हिस्सा (वर्तमान ए.बी. रोड) आज एक प्रमुख आंतरिक रोड बन चुका है। 2018 के चुनाव में सुमित्रा महाजन द्वारा ट्रैफिक समस्या को लेकर एबी रोड का भी उल्लेख करने पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंच से  एबी रोड पर ट्रैफिक सुधार के लिए 250 करोड़ की राशि के एलीवेटेड रोड की घोषणा की गई। यह केंद्रीय सड़क निधि योजना के अंतर्गत बनना है। सन् 2000 से पूर्व ही आगरा–मुंबई राष्ट्रीय मार्ग के ट्रैफिक के लिए बायपास निर्मित हो चुका है, जिसके बाद यह एबी रोड मुख्यतः शहर के आंतरिक आवागमन के लिए प्रयुक्त हो रहा है। सामान्यत: एलिवेटेड कॉरिडोर राजमार्ग या राष्ट्रीय राजमार्ग को आबादी को और ट्रैफिक दोनों को परेशानी से बचाने के लिए और समय ईंधन की बचत के लिए इसका बनाया जाता है। जैसा कि नासिक, जालंधर और कानपुर में हुआ है। यह बातें शहर के प्रमुख सिविल इंजीनियर अतुल सेठ ने कहीं है।

सेठ ने कहा कि एबी रोड पर नगर के आठ प्रमुख चौराहे और पंद्रह से अधिक आंतरिक मार्ग जुड़े हुए हैं। यह रोड इन सभी को आपस में जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क पथ है। वस्तुतः ऐसा कोई ट्रैफिक नहीं है जो प्रारंभिक बिंदु से अंतिम बिंदु तक सतत रूप से संचालित होता हो। 2024 में कराए सर्वेक्षण में भी इसकी उपयोगिता बहुत कम पाई गई। आपत्तियों के कारण पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में यह कार्य शुरू नहीं हो सका। इसे निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। 2023 के पश्चात पुनः इस परियोजना का उद्घाटन किया गया। व्यापक आपत्तियों और तथ्यों के संज्ञान में लाने पर तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज से सर्वेक्षण कराया, जिसमें इस कॉरिडोर की उपयोगिता 2 प्रतिशत से भी कम पाई गई।

जानकारी अनुसार बाद में इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त भुजाएं (रैम्प) जोड़ने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, किंतु संशोधित स्वरूप में भी उपयोगिता 10 प्रतिशत से अधिक नहीं आंकी गई। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री द्वारा 7 सितंबर 2024 को घोषणा की गई कि शहर में पूर्ण एलिवेटेड कॉरिडोर के स्थान पर आवश्यकता अनुसार चौराहा-आधारित पृथक निर्माण कार्य किए जाएंगे। इंदौर विकास प्राधिकरण(आईडीए)  द्वारा किए गए विस्तृत सर्वेक्षण में यह सिद्ध हुआ कि चरणबद्ध चौराहा सुधार और आवश्यक निर्माण कार्यों से 42 प्रतिशत से अधिक उपयोगिता प्राप्त की जा सकती है। इससे निर्माण लागत भी तुलनात्मक रूप से बहुत कम होगी और नागरिकों को निर्माण के दौरान न्यूनतम असुविधा होगी, किन्तु हाल ही में पुनः मूल एलिवेटेड कॉरिडोर योजना को आगे बढ़ाने के प्रयास प्रारंभ हुए हैं। प्रस्तावित निर्माण के अंतर्गत भूमिगत जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज तथा अन्य उपयोगिता लाइनों के स्थानांतरण के लिए कोई समुचित आकलन, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन या अभिकल्प उपलब्ध नहीं है, जिससे लागत और समय-सीमा में अत्यधिक वृद्धि की संभावना है। वर्ष 2020 में अनुमानित 250 करोड़ की लागत, वर्तमान संशोधित स्वरूप में 600 करोड़ से अधिक होगी, जबकि अंतिम लागत का कोई स्पष्ट आकलन उपलब्ध नहीं है।



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