विंध्य के दिग्गज नेताओं की चुप्पी पर भड़का सवर्ण समाज; UGC के 'काले कानून' पर अपनों ने ही खोला मोर्चा Aajtak24 News

विंध्य के दिग्गज नेताओं की चुप्पी पर भड़का सवर्ण समाज; UGC के 'काले कानून' पर अपनों ने ही खोला मोर्चा Aajtak24 News

रीवा - विंध्य की राजनीति में इन दिनों एक नई चिंगारी सुलग रही है। UGC के नए नियमों (UGC Regulations) को लेकर जहां देशभर में बहस छिड़ी है, वहीं विंध्य क्षेत्र के कद्दावर सवर्ण नेताओं की 'खामोशी' अब उनके ही मतदाताओं को चुभने लगी है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक जनता अब अपने प्रतिनिधियों से सीधे और कड़े सवाल पूछ रही है।

"क्या समाज की आवाज सिर्फ तेरहवीं-वर्षी तक सीमित है?"

क्षेत्र के सामान्य वर्ग के मतदाताओं का आरोप है कि सांसद जनार्दन मिश्रा, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, सिद्धार्थ तिवारी, अभय मिश्रा और दिव्यराज सिंह जैसे दिग्गज नेता इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं। आक्रोशित लोगों का कहना है कि ये नेता सवर्णों (ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया) के वोट लेकर सत्ता के शिखर पर तो पहुंच गए, लेकिन जब समाज के अधिकारों पर 'काले कानून' का खतरा मंडराया, तो सबने अपनी आंखें मूंद लीं।

नेताओं की योग्यता पर उठे सवाल

जनता के बीच इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि क्या इन नेताओं को इस बिल की गंभीरता का अंदाजा नहीं है या वे जानबूझकर इसे अनदेखा कर रहे हैं? सोशल मीडिया पर लोग तीखे तंज कसते हुए कह रहे हैं कि "ये नेता बस गमी और तेरहवीं के आयोजनों में शामिल होने के लिए चुने गए हैं, समाज की हक की लड़ाई लड़ने के लिए नहीं।"

वोट की चोट की चेतावनी

विंध्य की जनता ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके प्रतिनिधि समाज की आवाज नहीं बनते, तो आने वाले समय में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। "गद्दारों समाज की आवाज भी बनोगे या सामान्य वर्ग को ऐसे ही आईना दिखाओगे?" जैसे कड़े शब्दों के साथ अब सवर्ण समाज लामबंद हो रहा है।

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