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| भू-माफियाओं के चंगुल में जल स्रोत: कटरा का ऐतिहासिक तालाब अस्तित्व की जंग हार रहा Aajtak24 News |
रीवा - एक ओर सरकार 'जल संवर्धन' और 'अमृत सरोवर' जैसे अभियानों के जरिए गिरते जलस्तर को बचाने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर जिला रीवा की तहसील त्योंथर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कटरा में भू-माफिया और सफेदपोशों के गठजोड़ ने प्रकृति के एक अनमोल उपहार—तालाब—को निगलना शुरू कर दिया है। पुराना राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के पूर्व में स्थित लगभग 15-20 एकड़ का विशाल निजी तालाब आज टुकड़ों में कटकर बिक रहा है और वहां आलीशान महलों व सरकारी कार्यालयों की नींव रखी जा रही है।
राजस्व रिकॉर्ड से गायब होता अस्तित्व
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से कंप्यूटराइज्ड खसरों में छेड़छाड़ की गई है। तालाब के उल्लेख को रिकॉर्ड से हटाकर इसे 'आवासीय' या 'बिक्री योग्य' भूमि के रूप में दर्शाया जा रहा है। इसी तकनीकी खेल का फायदा उठाकर भू-माफिया इसे कीमती प्लॉटों के रूप में ऊंची कीमतों पर बेच रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पंजीयन विभाग और राजस्व विभाग इस पूरे खेल पर मौन साधे हुए हैं।
पर्यावरण पर गहराता संकट
यह तालाब पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण क्षेत्र के लिए 'लाइफलाइन' का काम करता था। जल भराव होने पर इसके आसपास के कुओं और ट्यूबवेलों का जलस्तर बना रहता था। अब यहां कई भवन बन चुके हैं और कई निर्माणाधीन हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि यह तालाब पूरी तरह समाप्त हो गया, तो आने वाली गर्मियों में यह क्षेत्र भीषण जल संकट की चपेट में होगा।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख मार्गों के समीप होने के कारण इस तालाब की जमीन अब करोड़ों की हो चुकी है। राजनेताओं के संरक्षण के चलते जिला प्रशासन और संभागीय आयुक्त कार्यालय भी इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाते नहीं दिख रहे हैं। जबकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि जल निकायों और सार्वजनिक उपयोग की भूमियों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण अवैध है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि क्या रीवा जिला प्रशासन इस मामले में 'स्वमेव संज्ञान' लेकर निर्माण कार्यों पर रोक लगाता है, या फिर भू-माफियाओं के इस चमकते महल के नीचे कटरा की प्यास दबकर रह जाएगी।
