| मऊगंज में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहराया विवाद: भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच 'विश्वमित्र' गिरफ्तार Aajtak24 News |
मऊगंज - नवगठित मऊगंज जिले में प्रशासनिक अराजकता और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करना अब तीखे संघर्ष का रूप ले चुका है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले प्रशासन पर अब 'दोहरे मापदंड' अपनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
अनशनकारी विश्वमित्र गिरफ्तार, निषेधाज्ञा पर उठे सवाल
बीते 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से शहीद स्मारक के समक्ष अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता 'विश्वमित्र' को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। अगस्त क्रांति मंच ने प्रशासन की इस कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए कहा कि जिले में धारा 144 (निषेधाज्ञा) केवल भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और जनता की आवाज कुचलने के लिए लगाई गई है।
विवाद के मुख्य बिंदु:
शिक्षा विभाग में दोहरा मापदंड: दलित शिक्षिका वार्डन शकुंतला नीरत के विरुद्ध की गई कार्रवाई को लेकर कलेक्टर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि समान मामलों में अन्य रसूखदारों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि दलित वर्ग से आने वाली शिक्षिका के खिलाफ द्वेषपूर्ण कार्रवाई की गई।
गौशालाओं की दुर्दशा: जिले की गौशालाओं में व्यापक भ्रष्टाचार और गौमाताओं की भूख-प्यास से हो रही मौतों का मुद्दा गरमाया हुआ है। सामाजिक संगठनों का आरोप है कि कलेक्टर इन मौतों को अनदेखा कर रहे हैं।
संवैधानिक अधिकारों का हनन: अगस्त क्रांति मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि संविधान ने हमें अनीति के खिलाफ बोलने का अधिकार दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि, "तानाशाह अफसरों के फर्जी मुकदमों और जेल का हमें डर नहीं है, प्रशासन में अराजकता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
सरकार से कलेक्टर को हटाने की मांग
जिले में बढ़ते जनाक्रोश के बीच अब नागरिक संगठनों ने प्रदेश सरकार से मऊगंज कलेक्टर को तत्काल हटाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिले के आला अफसर जनहित की बजाय दमनकारी नीतियों पर काम कर रहे हैं।
निष्कर्ष और अगले कदम
यह मामला अब केवल स्थानीय भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही का बन गया है।