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| रीवा-मऊगंज: धान खरीदी के खेल में बिचौलिए हुए मालामाल, सरकारी गोदामों में 'धन वर्षा' और किसान आज भी बदहाल Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश के रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में धान खरीदी प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। किसानों के नाम पर शुरू की गई सरकारी योजनाओं का लाभ असली अन्नदाता तक पहुँचने के बजाय बिचौलियों और 'भ्रष्ट सिस्टम' की तिजोरियों तक पहुँच रहा है। ताजा हालात यह हैं कि सरकारी गोदामों में गुणवत्ता विहीन धान का भंडारण धड़ल्ले से जारी है, जिसे लेकर प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
धान खरीदी में अनियमितताओं के आरोप: सरकारी गोदामों में गुणवत्ता पर सवाल, बिचौलिए सक्रिय
रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में धान खरीदी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। आरोप लग रहे हैं कि सरकारी गोदामों में गुणवत्ता मानकों के अनुरूप धान का भंडारण नहीं किया जा रहा है, जिससे बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति पूर्व के वर्षों में सामने आई विसंगतियों की याद दिलाती है, जब जांच के दौरान गुणवत्ता और भंडारण में खामियां पाई गई थीं। किसानों के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ उन तक पूरी तरह नहीं पहुँच पा रहा है, जबकि बिचौलियों के माध्यम से कम गुणवत्ता वाले धान की खरीदी और भंडारण के आरोप सामने आ रहे हैं। इस स्थिति से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचने और वास्तविक किसानों के हितों की अनदेखी होने की संभावना जताई जा रही है।
पूर्व में हुई जांचों में कई विसंगतियां उजागर होने के बावजूद, वर्तमान स्थिति को देखते हुए सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुरानी गलतियों से सबक लिया गया है। गोदामों में भंडारित धान की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है, जिसका सीधा असर भविष्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत वितरित होने वाले अनाज पर पड़ सकता है। किसानों की स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से शुरू की गई योजनाओं के बावजूद, यदि ऐसी अनियमितताएं जारी रहती हैं, तो यह किसानों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है। यह देखना होगा कि क्या प्रशासन इन आरोपों की जांच करता है और गोदामों में भंडारित धान की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है।
