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| रीवा-मऊगंज में नशे का तांडव: मेडिकल सिरप और गोलियों ने छीनी युवाओं की मुस्कान, बढ़ रही आत्महत्याएँ Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - विंध्य क्षेत्र के रीवा और नवगठित मऊगंज जिले में नशा अब एक महामारी का रूप ले चुका है। वर्तमान समय में यहाँ की युवा तरुणाई आर्थिक और शारीरिक पतन के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। आंकड़ों और जनचर्चा के अनुसार, लगभग 90% युवा मेडिकल नशे (प्रतिबंधित सिरप और नशीली गोलियों) की गिरफ्त में हैं। इसके अलावा ब्राउन शुगर, गांजा और शराब ने भी घरों को तबाह कर दिया है। हाल ही में गढ़ थाना क्षेत्र से आई एक हृदयविदारक खबर ने पूरे प्रशासन को झकझोर दिया है। खबर है कि नशे की पूर्ति न होने और कथित तौर पर पुलिस के सख्त व्यवहार से आहत होकर एक 20 वर्षीय युवक ने मौत को गले लगा लिया। चर्चा है कि युवक अपनी फरियाद लेकर थाने गया था, जहाँ उसे मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग के बजाय 'डंडे की काउंसलिंग' मिली। मृतक ने कथित तौर पर पुलिस के सामने ही आत्महत्या की चेतावनी दी थी, जिसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
आर्थिक तंगी और अपराध का गठजोड़ नशे की लत इतनी हावी है कि पैसा न मिलने पर युवा घरों में ही चोरियां कर रहे हैं। जब नशे की तलब पूरी नहीं होती, तो हताशा में युवा आत्महत्या जैसे खौफनाक कदम उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि 'नशा माफिया' फल-फूल रहे हैं, जबकि पुलिस का रवैया पीड़ितों के प्रति संवेदनहीन बना हुआ है। हालाँकि, पुलिस प्रशासन ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सच्चाई क्या है, यह तो सीसीटीवी फुटेज और उच्च स्तरीय खुफिया जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि यदि समय रहते इस 'मेडिकल नशे' के कारोबार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाली पीढ़ी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
