खाकी के 'मदहोश' पहरेदार? रीवा के कुछ थानों में रात होते ही सजता है 'मयखाना', नशे में आपस में ही भिड़े जवान! Aajtak24 News

खाकी के 'मदहोश' पहरेदार? रीवा के कुछ थानों में रात होते ही सजता है 'मयखाना', नशे में आपस में ही भिड़े जवान! Aajtak24 News

रीवा - जब शहर सोता है, तब सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के कंधों पर होती है। लेकिन रीवा जिले के कुछ थानों से जो खबरें छनकर आ रही हैं, वे सुशासन के दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। जनचर्चा है कि जिले के कई थानों में रात 11 बजे के बाद अपराधों पर अंकुश लगाने की रणनीति नहीं, बल्कि 'मयखाना' सजता है।

वर्दी में नशा और आपस में ही 'महाभारत'

जनवरी 2026 में रीवा का एक थाना इस वक्त चर्चा के केंद्र में है। सूत्रों और जनचर्चा के अनुसार, हाल ही में एक थाने के भीतर 'नशा पार्टी' का आयोजन किया गया। नशे का सुरूर इतना बढ़ा कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी आपस में ही भिड़ गए। वर्दी की गरिमा को ताक पर रखकर गाली-गलौज और मारपीट तक की नौबत आ गई, जिसे बाद में बड़ी मुश्किल से शांत कराया गया।

गेट से 'इश्क' और सीसीटीवी के रहस्य

एक अन्य हैरान करने वाली घटना में बताया जा रहा है कि नशे में धुत एक अधिकारी थाने के गेट से ही लिपट गए। संतुलन बिगड़ने के कारण वे गिर पड़े और उन्हें चोटें भी आईं। कहा जा रहा है कि यदि उस थाने के सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच हो, तो पुलिस की इस 'कर्तव्यनिष्ठा' का कच्चा चिट्ठा सामने आ सकता है।

अपराध बढ़ने का मुख्य कारण?

रीवा में बढ़ती वारदातों के पीछे एक बड़ा कारण पुलिस की यह लापरवाही मानी जा रही है। एक तरफ प्रदेश में बल की कमी है, वहीं दूसरी ओर जो तैनात हैं, वे 'थकान मिटाने' के नाम पर नशे में इतने मदहोश रहते हैं कि आपातकालीन स्थिति में खुद को संभालने तक की स्थिति में नहीं होते। यद्यपि समाचार एजेंसी इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं करती, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों और जनचर्चा के आधार पर यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या रक्षक ही नशे के भक्षक बन रहे हैं? यदि सुबह के वक्त चिन्हित कर्मचारियों का मेडिकल परीक्षण कराया जाए, तो असलियत सामने आ सकती है। अब देखना यह है कि रीवा पुलिस अधीक्षक इस 'दरबारी संस्कृति' पर कब और कैसी लगाम लगाते हैं।

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