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| खाकी की कस्टडी में 'पुर्जा-पुर्जा' हुआ शिकार: थानों में खड़ी गाड़ियाँ बन रहीं कबाड़, बैटरियाँ और टायर गायब! Aajatk24 News |
रीवा: जिसे जनता सुरक्षा का मंदिर समझती है, अगर वहीं कीमती सामान सुरक्षित न रहे तो गुहार किससे लगाई जाए? रीवा के थानों से एक ऐसा चौंकाने वाला खेल सामने आ रहा है, जहाँ पुलिस की अभिरक्षा (Custody) में रखे वाहन अब सुरक्षित नहीं हैं। विभिन्न आपराधिक मामलों और दुर्घटनाओं के बाद थानों में ज़ब्त कर खड़े किए गए वाहनों से कीमती पुर्जे, लाइट और महंगी बैटरियाँ रहस्यमय तरीके से गायब हो रही हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि 'वर्दी' की नाक के नीचे चल रहा एक बड़ा खेल है।
रक्षक ही जब मौन हों, तो भक्षक कौन?
हाल ही में कई ऐसे वाहन मालिक सामने आए हैं, जिन्होंने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब अपनी गाड़ी वापस मांगी, तो उनके होश उड़ गए। किसी की गाड़ी की बैटरी गायब थी, तो किसी के टायर बदल दिए गए थे। पीड़ितों का साफ़ आरोप है कि उन्होंने अपनी गाड़ियाँ सुरक्षित समझकर पुलिस के हवाले की थीं, लेकिन अब वे गाड़ियाँ 'कंकाल' में तब्दील हो चुकी हैं।
एक पीड़ित की व्यथा: "हादसे के बाद पुलिस ने गाड़ी थाने में खड़ी करवाई थी। सोचा था सुरक्षित रहेगी, लेकिन जब छुड़ाने पहुँचा तो पता चला कि बैटरी और कीमती पार्ट्स चोरी हो चुके हैं। थाने के अंदर से चोरी होना सिस्टम पर बड़ा सवाल है।"
अधिकारियों का 'मौन' व्रत: जिम्मेदारी से बचता विभाग
इस गंभीर 'पार्ट्स घोटाले' पर जब वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल किए गए, तो जवाब के नाम पर सिर्फ चुप्पी मिली। कोई भी अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं है कि थानों के मालखाने और परिसर में रखे सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? विभागीय स्तर पर इन शिकायतों को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे संदेह की सुई अपनों पर ही घूमने लगी है।
भौतिक सत्यापन हुआ तो खुलेगी पोल
अगर प्रशासन वास्तव में ईमानदार है, तो उसे थानों में खड़े वाहनों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करवाना चाहिए। यदि एक निष्पक्ष और गोपनीय जाँच की जाए और वाहन मालिकों से रूबरू बात हो, तो पुलिस की अभिरक्षा में चल रहे इस 'पुर्जा घोटाले' की हकीकत सबके सामने आ जाएगी।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
क्या पुलिस थानों के अंदर सीसीटीवी कैमरे और संतरी की मौजूदगी में भी चोरियां हो रही हैं?
क्या बाहरी चोरों के नाम पर विभाग के ही कुछ लोग इस खेल में शामिल हैं?
वाहन मालिकों के आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
रीवा की जनता अब रीवा एसपी और आला अधिकारियों से जवाब चाहती है। क्या थानों को 'कबाड़खाना' बनने से रोका जाएगा या फिर इसी तरह 'खाकी' की साख पर बट्टा लगता रहेगा?
