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| रीवा-मऊगंज में 'मधुशाला' का मकड़जाल: हर महीने 50 लाख की 'मुफ्त' शराब और थानों में बँटता 'सेवा शुल्क'! Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश के रीवा एवं मऊगंज जिलों में आबकारी विभाग द्वारा संचालित देशी व विदेशी मदिरा दुकानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय सूत्रों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शराब दुकानों की नीलामी प्रतिवर्ष अप्रैल माह में होती है और मार्च तक उनका संचालन किया जाता है। नीलामी प्रक्रिया के बाद प्रारंभिक कुछ महीनों तक सब कुछ नियमों के विपरीत चलता दिखाई देता है, किंतु जून माह तक आते-आते कथित रूप से गतिविधियाँ सुचारू रूप से चलती दिखती हैं।
सूत्रों का आरोप है कि इस अवधि में पैयकारी (थोक बिक्री) तथा अवैध शराब की दुकानों का संचालन खुलेआम किया जाता है। इस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कथित आरटीआई कार्यकर्ताओं तथा स्वयंभू समाज सुधारकों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। बताया जाता है कि जून के बाद अचानक सब कुछ “सामान्य” हो जाता है, जिससे यह संदेह और गहराता है कि व्यवस्था किसी आपसी समझौते के तहत संचालित की जा रही है।
डायरी में दर्ज ‘हिस्सेदारी’ का आरोप
मऊगंज/रीवा जिले से जुड़े एक बड़े दावे के अनुसार, आबकारी दुकानों से माशिक लगभग 50 लाख रुपये मूल्य की शराब पुलिस, नेता, पत्रकार है, जिसका उपयोग या वितरण प्रभावशाली लोगों में निःशुल्क किया जाता है। आरोप है कि इसमें पुलिस अधिकारियों और कुछ पत्रकारों की संलिप्तता भी बताई जा रही है। यह शराब या तो निशुल्क दी जाती है या आधे मूल्य पर, जबकि कंपनी को पूरा हिसाब दिखाने के लिए इसे दुकानों की डायरी में दर्ज कर दिया जाता है।
थानों तक मासिक ‘सेवा शुल्क’ का दावा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मऊगंज जिले में कथित रूप से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक संरक्षण के बदले प्रति माह लगभग दो लाख रुपये तक का “सेवा शुल्क” दिए जाने की चर्चा है। इसके अतिरिक्त, हर चौकी थाना क्षेत्र के लिए अलग-अलग मासिक राशि तय होने का आरोप है। यह राशि चौकी के लिए न्यूनतम 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख तक ओही पर कुछ थानों में 1 लाख से 3 लाख रुपये प्रतिमाह तक बताई जा रही है। आरोप यह भी है कि इन भुगतानों के बाद संबंधित लोग अपने-अपने हिस्से लेकर चुप्पी साध लेते हैं और तथाकथित समाज सुधार केवल दिखावे तक सीमित रह जाता है।
थाने के पास पड़ी शराब की बोतलें
रीवा जिले के एक थाना परिसर के समीप बड़ी संख्या में खाली शराब की बोतलों का वीडियो सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर थाने से इतनी मात्रा में बोतलें एकत्र की जाएँ, तो कोई भी व्यक्ति लखपती बन सकता है। यह दृश्य जिले की कानून व्यवस्था और कथित ईमानदार छवि पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
प्रशासन से जवाब की अपेक्षा
इन आरोपों को लेकर आबकारी विभाग, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि ये आरोप निराधार हैं, तो निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जानी चाहिए। वहीं, यदि इनमें सच्चाई है, तो यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है। आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है जनचर्चा और विश्वश सूत्रो के आधार पर आधारित है।
