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| रीवा संभाग में जुआ कारोबार चरम पर, हर शहर-कस्बे तक फैला नेटवर्क — कर्मचारी से लेकर ग्रामीण तक सम्मिलित Aajtak24 News |
रीवा - रीवा संभाग में जुआ अब खुलेआम फल-फूल रहा है। यह अवैध कारोबार अब किसी एक इलाके तक सीमित नहीं, बल्कि संभाग के हर बड़े शहर, कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों तक गहराई से अपनी जड़ें जमा चुका है। अनुमान है कि प्रतिदिन करोड़ों रुपये का जुआ यहां खेला जाता है, जिसमें आम नागरिकों से लेकर कुछ सरकारी कर्मचारी तक शामिल हैं। नाम न छापने की शर्त पर कई लोगों ने बताया कि रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, सीधी और सिंगरौली जिलों में यह अवैध कारोबार पूरे 365 दिन चलता है। इसका संचालन ऐसे लोगों के हाथों में है जिनका सीधा संबंध राजनीति और प्रभावशाली वर्ग से है। यही वजह है कि प्रशासनिक और पुलिस अमला भी इन संचालकों पर कार्यवाही करने से कतराता है।
जुआ अड्डों पर मिलती हैं तमाम सुविधाएं, सूदखोरों का जाल भी सक्रिय
सूत्रों के अनुसार, इन जुआ अड्डों पर खिलाड़ियों को मुफ्त में बीयर, शराब, सिगरेट, नाश्ता, यहां तक कि आने-जाने का किराया तक दिया जाता है। इन जगहों पर सूदखोर भी मौजूद रहते हैं जो 20 प्रतिशत ब्याज पर रुपये उधार देकर जुआरियों को फंसाते हैं। कई बार लोग अपने मोबाइल, जेवरात और अन्य कीमती सामान तक गिरवी रखकर खेल में बने रहने की कोशिश करते हैं। जुआ खेलने का पैमाना भी चौंकाने वाला है — कई स्थानों पर प्रति सेकंड ₹10 तक की दर से दांव लगाए जाते हैं। परिणामस्वरूप, अनेक घर आर्थिक रूप से तबाह हो चुके हैं। कुछ परिवारों में तो हालात इतने बिगड़े कि लोग आत्महत्या तक करने को मजबूर हो गए हैं।
कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, खुफिया तंत्र की निष्क्रियता उजागर
जिले और संभाग के स्तर पर कानून व्यवस्था की लाचारी और खुफिया तंत्र की उदासीनता इस पूरे नेटवर्क को फलने-फूलने में मदद कर रही है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस को जानकारी होने के बावजूद, बड़े संचालकों तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाती। कारण — इस काले कारोबार पर कुछ राजनीतिक संरक्षण और धनबल का प्रभाव। सरकार को इस पर तत्काल सख्त कानून बनाकर जुआ संचालकों और उनके संरक्षणकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। यह न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी तोड़ रहा है।
करोड़पति बन चुके संचालक, समाज पर मंडरा रहा खतरा
जुआ नेटवर्क चलाने वाले कई संचालक अब करोड़ों के मालिक बन चुके हैं। उन्होंने इस अवैध कारोबार से आलीशान मकान, लग्जरी गाड़ियां और बड़े कारोबारी नेटवर्क खड़े कर लिए हैं। वहीं, दूसरी ओर समाज का कमजोर वर्ग अपनी जमा पूंजी गंवाकर दर-दर की ठोकरें खा रहा है। जनचर्चा है कि अगर सरकार ने अब भी इस दिशा में निर्णायक कदम नहीं उठाए, तो रीवा संभाग जल्द ही जुए और अवैध लेन-देन का गढ़ बन जाएगा।
