![]() |
| GST राहत के बाद अब RBI का 'बड़ा सरप्राइज' संभव: अमेरिकी टैरिफ और कमजोर मांग के दबाव में क्या EMI पर मिलेगा डिस्काउंट? Aajtak24 News |
नई दिल्ली - जीएसटी दरों में कटौती और आयकर राहत के बाद अब आम भारतीय उपभोक्ताओं को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक और बड़ी राहत मिलने की प्रबल उम्मीद है। RBI की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आज, 29 सितंबर से शुरू हो गई है, जिसका निर्णय 1 अक्टूबर को आएगा। इस बैठक में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा रेपो रेट पर अहम फैसला लेंगे। बाजार में बड़ा संशय बना हुआ है: क्या RBI रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखेगा, या फिर कमजोर निवेश और बाहरी दबावों को देखते हुए 'सरप्राइज रेट कट' का विकल्प चुनेगा? यदि RBI दरों में कटौती करता है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI का बोझ सीधे तौर पर कम होगा, जो त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत होगी।
अर्थशास्त्रियों की राय बंटी: कटौती के पक्ष में मजबूत तर्क
हालाँकि करीब तीन-चौथाई अर्थशास्त्री यथास्थिति बनाए रखने का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकॉनॉमिक्स और एसबीआई जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं ने दर कटौती की संभावना को खारिज नहीं किया है।
कमजोर मांग: इस साल RBI ने 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की, लेकिन निजी निवेश में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास दर पर दबाव और मांग में कमी के कारण अब मौद्रिक ढील की सख्त जरूरत है।
नरम महंगाई: खुदरा महंगाई दर अभी भी RBI के लक्ष्य दायरे में है, जिससे केंद्रीय बैंक के पास दरों में कटौती का पर्याप्त मौका है।
वैश्विक दबाव और 'इंश्योरेंस रेट कट' की चर्चा
अक्टूबर की यह बैठक मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक दबावों के कारण 'लाइव' हो गई है:
अमेरिकी टैरिफ का खतरा: अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा दिया है और वीजा फीस बढ़ाई है, जिससे सेवाओं के व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है। अर्थशास्त्री मानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ से भारत की जीडीपी ग्रोथ को झटका लग सकता है।
बचाव का कदम: सिटी इकॉनॉमिस्ट्स ने RBI द्वारा 'इंश्योरेंस रेट कट' अपनाने की बात कही है। इसका मतलब है कि RBI, बाहरी झटकों और रुपये की कमजोरी के असर का इंतजार करने के बजाय, अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पहले ही एहतियाती कदम उठा सकता है।
आगे भी कटौती संभव: कैपिटल इकॉनॉमिक्स ने अनुमान लगाया है कि RBI अगले हफ्ते दरों में कटौती कर सकता है और दिसंबर में एक और कटौती संभव है।
सरकार के प्रयासों और RBI की भूमिका
सरकार ने हाल ही में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए आयकर राहत और जीएसटी दरों में बड़ी कटौती जैसे कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ब्याज दरों में ढील देना अब ज़रूरी है, ताकि खपत को बढ़ावा मिले और सरकारी प्रयासों को बल मिले। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने आगाह किया है कि RBI मुद्रा स्थिरता को प्राथमिकता दे सकता है और पहले से की गई कटौतियों के प्रभाव का आकलन करने का इंतजार कर सकता है। लेकिन व्यापक मांग सुस्त रहने की संभावना को देखते हुए, दरों में कटौती आरबीआई के दायित्व को दर्शाती है।
