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| बिहार में 'दरोगा' भर्ती को लेकर छात्रों का महाप्रदर्शन, पटना की सड़कें बनीं रणभूमि, पुलिस ने किया लाठीचार्ज Aajtak24 News |
पटना - बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले, राज्य सरकार के लिए युवाओं का गुस्सा एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। सोमवार को बिहार की राजधानी पटना में हजारों की संख्या में बेरोजगार युवाओं ने दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) भर्ती की मांग को लेकर एक विशाल प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
चुनाव से पहले 'नौकरी' की मांग
इस प्रदर्शन की मुख्य वजह बिहार पुलिस में पिछले दो वर्षों से कोई नई दारोगा भर्ती न आना है। हजारों की संख्या में युवा पूरे बिहार से पटना पहुंचे। उनके हाथों में तिरंगे झंडे थे और वे नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह थी कि चुनाव आयोग द्वारा आचार संहिता लागू करने से पहले सरकार को दारोगा बहाली की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। उन्हें डर है कि यदि अभी भर्ती की घोषणा नहीं हुई तो यह मौका लंबे समय तक के लिए टल जाएगा, जिससे उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा जाएंगे।
डाक बंगला चौराहे पर बवाल
पटना कॉलेज से शुरू हुआ यह छात्रों का मार्च गांधी मैदान को पार करते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहा था। पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए जेपी गोलंबर और डाक बंगला चौराहे पर बैरिकेडिंग लगा रखी थी। हालांकि, युवाओं की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और इनकम टैक्स चौराहे की ओर बढ़ने लगे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पहले छात्रों को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन जब वे पीछे नहीं हटे तो पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। लाठीचार्ज से भगदड़ मच गई और कई छात्र घायल हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान एक शिक्षक, रोशन, को हिरासत में लिए जाने के बाद छात्रों का गुस्सा और भड़क गया।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
इस प्रदर्शन में सिर्फ भर्ती की मांग ही नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। छात्रों का आरोप है कि बिहार पुलिस सेवा आयोग (BPSSC) और केंद्रीय चयन पर्षद (CSBC) भर्ती परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी और उत्तर कुंजी (आंसर-की) उपलब्ध नहीं कराती हैं। उन्होंने इन संस्थाओं से एक निश्चित भर्ती कैलेंडर जारी करने की भी मांग की, ताकि उम्मीदवारों को स्पष्ट जानकारी मिल सके और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। इस आंदोलन में सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि कई शिक्षक और शिक्षक नेता भी शामिल हुए, जिन्होंने युवाओं की आवाज को और बुलंद किया। छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा।
