वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: विपक्ष क्यों खुश, बीजेपी क्यों बता रही है अपनी जीत? Aajtak24 News

वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: विपक्ष क्यों खुश, बीजेपी क्यों बता रही है अपनी जीत? Aajtak24 News

नई दिल्ली - वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। इस फैसले के बाद जहां विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इसे अपनी बड़ी जीत मान रही है, वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी इसे लोकतंत्र की जीत बता रही है। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पूरे कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन इसके कई विवादास्पद प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे याचिकाकर्ताओं और मुस्लिम समुदाय को आंशिक राहत मिली है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और विपक्ष की खुशी

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विपक्ष में खुशी की लहर है। कांग्रेस का कहना है कि यह आदेश न केवल उन राजनीतिक दलों की जीत है जिन्होंने संसद में इस कानून का विरोध किया था, बल्कि उन संसदीय समिति के सदस्यों की भी जीत है जिन्होंने अपनी असहमति नोट में इस कानून की खामियों को उजागर किया था। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस फैसले को "सरकार की साजिश और इरादों पर लगाम" बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्होंने अपनी जमीनें वक्फ के लिए दान की थीं और उन्हें डर था कि सरकार इन जमीनों को हड़पने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार कैसे तय कर सकती है कि कोई व्यक्ति 5 साल से मुस्लिम धर्म का पालन कर रहा है, क्योंकि यह आस्था का मामला है।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने भी इस आदेश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मूल कानून में अंतर्निहित 'शरारतपूर्ण मंशा' को खत्म करने की दिशा में एक लंबा रास्ता तय करने वाला है। उन्होंने बताया कि विपक्षी दलों के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया था कि इस कानून के जरिए ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति वक्फ की संपत्ति की स्थिति को चुनौती दे सकता है, जिससे संपत्तियों की स्थिति हमेशा अनिश्चित रहेगी। जयराम रमेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी तर्कों को सही ठहराया है।

बीजेपी का रुख: लोकतंत्र और कानून की जीत

वहीं, केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बीजेपी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है क्योंकि अगर संसद में कोई कानून बनता है तो उसे खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे कानून पर रोक नहीं लगाई है, जो यह साबित करता है कि कानून संवैधानिक रूप से वैध है। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि जब देश के शीर्ष न्यायालय से कोई फैसला आता है तो उसका बड़ा असर होता है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 महत्वपूर्ण बातें

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तीन प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित था:

  1. वक्फ संपत्तियों को डी-नोटिफाई करना: कोर्ट ने इस पर रोक नहीं लगाई, लेकिन स्पष्ट किया कि विस्तृत सुनवाई में इस पर विचार होगा।

  2. वक्फ बोर्ड की संरचना: कोर्ट ने बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या तय की।

  3. कलेक्टर का जांच अधिकार: इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

इन बिंदुओं पर कोर्ट ने जो अहम फैसले दिए, वे इस प्रकार हैं:

  • पूरे वक्फ कानून पर रोक नहीं: मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति अगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि पूरे कानून को रोकने का कोई आधार नहीं है और ऐसा हस्तक्षेप केवल दुर्लभतम मामलों में ही किया जा सकता है।

  • '5 साल तक मुस्लिम' की शर्त पर रोक: धारा 3(आर) के तहत यह शर्त कि किसी व्यक्ति को वक्फ करने के लिए 5 वर्षों तक इस्लाम का पालन करना चाहिए, को कोर्ट ने अस्थायी रूप से रोक दिया। इसे भेदभावपूर्ण और मनमाना माना गया।

  • कलेक्टर को अधिकार पर रोक: धारा 3(सी) के तहत जिला कलेक्टर को यह तय करने का अधिकार कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर को यह शक्ति देना 'शक्तियों के पृथक्करण' के सिद्धांत के खिलाफ है और इससे मनमानी और विवाद बढ़ सकते हैं।

  • संपत्ति से बेदखली नहीं: जब तक ट्रिब्यूनल या अदालत अंतिम निर्णय नहीं ले लेती, तब तक किसी भी वक्फ संपत्ति से किसी को बेदखल नहीं किया जाएगा।

  • तीसरे पक्ष के अधिकार पर रोक: विवाद का निपटारा होने तक वक्फ संपत्ति पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार का सृजन नहीं किया जा सकेगा।

  • गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या तय: केंद्रीय वक्फ परिषद में 22 सदस्यों में से 4 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे, और राज्य वक्फ बोर्डों में 3 से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते हैं।

  • पंजीकरण पर रोक नहीं: कोर्ट ने माना कि वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण 1995 से चला आ रहा है और यह कोई नई आवश्यकता नहीं है।

  • CEO की नियुक्ति पर सुझाव: कोर्ट ने गैर-मुस्लिम को राज्य वक्फ बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने पर रोक नहीं लगाई, लेकिन कहा कि जहां संभव हो, मुस्लिम व्यक्ति को नियुक्त किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जहां एक ओर कानून की वैधता को बरकरार रखा गया है, वहीं दूसरी ओर इसके कुछ विवादास्पद प्रावधानों पर रोक लगाकर समुदाय की चिंताओं को भी दूर करने का प्रयास किया गया है। यह फैसला न्यायिक सक्रियता और कानून की समीक्षा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

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